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राष्ट्रपति मुर्मू ने पनडुब्बी INS वाघषीर में यात्रा की

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कर्नाटक के कारवाड़ नेवल बेस पर पनडुब्बी (सबमरीन) में यात्रा की। कलवरी क्लास की सबमरीन INS वाघषीर में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी राष्ट्रपति के साथ थे।

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राष्ट्रपति मुर्मू की कलवरी क्लास सबमरीन में यह पहली और किसी राष्ट्रपति की दूसरी यात्रा है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पहले राष्ट्रपति थे, जिन्होंने सबमरीन में यात्रा की थी।द्रौपदी मुर्मू भारतीय वायुसेना के दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति भी हैं। उन्होंने इस साल 29 अक्टूबर को राफेल और 2023 में सुखोई 30 MKI में उड़ान भरी।

स्कॉरपीन यानी कलवरी क्लास की सबमरीन INS वाघषीर को 4 साल पहले मुबंई के मझगांव डॉक्स से प्रोजेक्ट-75 के तहत लॉन्च किया गया था। बेहद आधुनिक नेविगेशन और ट्रैकिंग सिस्टम्स से लैस यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन है। इसमें कई घातक हथियार लगे हैं। इस सबमरीन को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

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प्रोजेक्ट-75 के तहत 5 आधुनिक पनडुब्बियों को देश के समुद्र की रक्षा में तैनात किया गया है। आईएनएस वाघषीर इस प्रोजेक्ट की आखिरी पनडुब्बी थी।

INS वाघषीर की खासियत..

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इनमें 4 एमटीयू 12V 396 SE84 डीजल इंजन और 360 बैटरी सेल्स लगे हैं।

पानी की सतह पर इसकी स्पीड 20 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है, जबकि पानी के अंदर ये 37 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है।

इसकी रेंज गति के मुताबिक तय होती है। अगर यह सतह पर 15 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही है, तो यह 12 हजार किलोमीटर तक चल सकती है।

पानी के अंदर यह 1020 किलोमीटर की रेंज तक जा सकती है लेकिन गति 7.4 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए।

यह कलवारी क्लास पनडुब्बी है। इस क्लास की पनडुब्बियों की लंबाई लगभग 221 फीट, बीम 20 फीट और ऊंचाई 40 फीट होती है।

यह सतह-विरोधी युद्ध (anti-surface warfare), पनडुब्बी रोधी युद्ध (anti-submarine warfare), खुफिया जानकारी एकत्र करना, समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाना और समुद्र के अंदर से निगरानी का काम कर सकती है।

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