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गत वर्ष की तुलना में उज्जैन जिले में बारिश अब तक 3 इंच कम

सीजन में सबसे अधिक बारिश नागदा तहसील में,

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जुलाई माह का कोटा पूरा नहीं हुआ

 

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। तीन दिन तक थोड़े-थोड़ अंतराल से शहर/जिले में बारिश हुई,लेकिन बरसात का आंकड़ा बीते वर्ष को पार नहीं कर पाया है। जिले में अभी तक गत वर्ष की तुलना में तीन इंच कम वर्षा दर्ज की गई। जिले की सभी तहसीलों में केवल माकड़ोन तहसील में ही पिछले साल के मुकाबले अधिक बरसात हुई। वैसे वर्तमान सीजन में सबसे अधिक बारिश नागदा में हो चुकी है।

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औसत बरसात के मामले में जुलाई माह का कोटा पूरा नहीं हुआ है। आमतौर पर जिले में जुलाई माह तक 18 से 20 इंच बरसात हो जाती है,पर इस मर्तबा करीब 3 से 4 इंच वर्षा कम हुई है। देवास-इंदौर और शिप्रा जल कैचमेंट एरिया में बरसात से नदी में पानी आया घाट,मंदिर और बडऩगर रोड का छोटा पूल डूबा,लेकिन नदी का पानी बड़े पूल के पास तक एक भी बार नहीं आया।

वर्षाकाल 1 जून से शुरू हो गया है। ऐसे में 61 दिन गुजर गए हैं। इस अवधि में जिले में अब तक औसत 435.6 मिमी (17.14 इंच से कुछ अधिक) वर्षा हुई है। गत वर्ष इसी अवधि में जिले में औसत 515.7 मिमी (20.30 इंच) वर्षा हुई थी। इस प्रकार गत वर्ष के मुकाबले80.1 मिमी (03.16 इंच) कम है। वर्षाकाल 30 सितंबर तक माना जाता है। जिले की औसत वर्षा 914.4 मिमी (36 इंच) है।

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बाढ़ का पानी उतरते ही बैरिकेड्स में फंसा कचरा, शिप्रा के घाटों पर फैल गई मिट्टी

उज्जैन। पिछले दो-तीन दिनों तक हुई बारिश के बाद शिप्रा नदी में बाढ़ आ गई थी। पानी छोटे पुल से 6 फीट ऊपर बह रहा था। सुबह तक नदी से पानी का लेवल कम हुआ तो घाटों पर रखे बेरिकेड्स में फंसा कचरा और घाटों पर मिट्टी व कीचड़ दिखने लगा जिसे नगर निगम की टीम ने मोटर के प्रेशर से वापस नदी में बहा दिया।


शिप्रा नदी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में देश भर के श्रद्धालु स्नान, पूजन अर्चन के लिये पहुंचते हैं। तीन दिनों से नदी में बाढ़ आने की वजह से नदी किनारे के मंदिर, घाट जलमग्न हो गये थे। सुबह नदी में पानी का लेवल कम होने लगा तो घाटों पर रखे बैरिकेड्स में फंसा कचरा और घाटों पर कीचड़ मिट्टी दिखने लगा।

बाढ़ में बहकर आई खेतों की मिट्टी से फिसलन होने के कारण नगर निगम की टीम द्वारा नदी के पानी में ही मोटर लगाकर पानी के प्रेशर से घाटों की धुलाई शुरू की गई और मिट्टी को वापस नदी में बहा दिया। इस दौरान बेरिकेड्स में कचरा फंसा रह गया जिसकी सफाई नहीं हो पाई थी।

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