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महाकाल महालोक में 50 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में रंगोली बनाई…

कल सुबह मंदिर में रुप चौदस और शाम को दीपावली मनेगी, बदल जाएगी दिनचर्या

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। इस बार दीपावली पर श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में एक भव्य और अद्वितीय कलात्मक पहल की जा रही है। मंदिर परिसर के लगभग 50 हजार वर्ग फीट में आकर्षक रंगोली बनाई गई है। मंदिर मेें कल सुबह रूप चौदस के मौके पर पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को अभ्यंग स्नान कराएंगी। यह साल में सिर्फ एक दिन रूप चौदस पर होता है। शाम को दीपोत्सव मनेगा।

रंगोली बनाने में कलाकारों की दो टीमें काम कर रही है। एक टीम पंकज सहरा के नेतृत्व में काम कर रही है इनके साथ कला मंच उज्जैनी के 20 कलाकार भी सहयोग कर रहे हैं। जबकि दूसरी टीम कुंज बिहारी पांडे के निर्देशन में 10 कलाकारों के साथ अलग काम कर रही है। ये सभी कलाकार सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया के मार्गदर्शन में अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे महाकाल का आंगन दीपोत्सव के लिए भव्य रूप से सज रहा है।

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दिवाली का उत्सव और अन्नकूट भोग

रूप निखारने के बाद गर्भगृह में पंडित-पुजारी फुलझड़ी जलाकर दिवाली उत्सव की शुरुआत करेंगे। पुजारी पं. राम शर्मा के मुताबिक दिवाली पर भगवान महाकाल को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। इसमें धान, खाजा, शक्करपारे, गूंजे, मूली और बैंगन की सब्जी सहित कई व्यंजन शामिल होते हैं।

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महाशिवरात्रि तक गर्म जल से स्नान करेंगे बाबा महाकाल

सोमवार तड़के चार बजे भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को सबसे पहले गर्म जल से स्नान कराया जाएगा। कार्तिक मास की चौदस से ही सर्दियों की शुरुआत मानी जाती है। ठंड से बचाव के लिए भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा है, जिसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। यह क्रम अब महाशिवरात्रि तक जारी रहेगा। वर्ष में केवल एक बार रूप चौदस (सोमवार सुबह) पर पुजारी-पुरोहित परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को केसर, चंदन, इत्र, खस और सफेद तिल से बना उबटन लगाएंगी। रूप निखारने के बाद पंचामृत पूजन और विशेष कर्पूर आरती होगी, जो केवल महिलाएं ही संपन्न करेंगी।

मंदिर को विदेशी फूलों से सजाया
दिवाली पर महाकाल मंदिर और मुख्य गुंबद को रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी, रंगोली और थाईलैंड, बैंकॉक, मलेशिया सहित भारत के विभिन्न शहरों के विशेष फूलों (एंथोरियम, लिली, कॉर्निशन आदि) से सजाया गया है।

आतिशबाजी पूर्णत: प्रतिबंधित
मंदिर की पारंपरिक और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप, पूजन के दौरान केवल एक फुलझड़ी जलाई जाएगी। इसके अलावा, गर्भगृह, कोटितीर्थ कुण्ड, मंदिर परिक्षेत्र और श्री महाकाल महालोक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आतिशबाजी, पटाखों का फोडऩा, या ज्वलनशील पदार्थ लाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

कल सुबह निखरेगा महाकाल का स्वरूप
श्री महाकाल मंदिर में सभी त्योहारों को देशभर में सबसे पहले मनाने की अनोखी परंपरा है। इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण 20 अक्टूबर, सोमवार को सुबह के समय रूप चौदस और शाम को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। रूप चौदस पर भगवान महाकाल का रूप निखारने के लिए विशेष अनुष्ठान होगा।

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