रिटायर्ड आर्मी लेफ्टिनेंट को मुंबई पुलिस बन किया डिजिटल अरेस्ट, बैंककर्मी की सतर्कता ने बचाया

तीन लाख रुपए आरटीजीएस करवाने से भी रोका
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रिटायर्ड आर्मी लेफ्टिनेंट और उनकी पत्नी को मुंबई पुलिस बनकर डिजिटल अरेस्ट करने मामले में बैंककर्मी एवं पुलिस ने समय रहते दंपत्ति को ठगी का शिकार होने से बचा लिया। बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने इसका खुलासा किया।
दरअसल, आर्मी से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट गंगाराम वर्मा अपनी पत्नी गीता के साथ ग्राम लेकोड़ा में रहते हैं। बीते दिन उन्हें मुंबई पुलिस का अधिकारी बनकर कॉल किया और कहा कि उनके नाम की सिम का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ हैं। अब तक इसम मामले में 136 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उनका नंबर 137वां है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट को विश्वास दिलाने के लिए उन्होंने वीडियो कॉल से पुलिस ऑफिस जैसा दृश्य ओर वर्दी पहने कुछ लोगों को भी दिखाया। गिरफ्तारी के डर से वह घबरा गए और तीन लाख रुपए ट्रांसफर करने की सहमति दे दी।
सीनियर एसोसिएट ने पुलिस को दी जानकारी
बुधवार को रिटायर्ड लेफ्टिनेंट भारतीय स्टेट बैंक की नईसडक़ शाखा पहुंचे। यहां उन्होंने तीन लाख रुपए आरटीजीएस करने को कहा। वह बेहद घबराए थे और पूछताछ करने पर ठीक से जानकारी नहीं दे पा रहे थे। जिसके बाद बैंक के सीनियर एसोसिएट प्रियांक ने अपनी सूझबूझ से खाचरौद एसडीओपी आकांश बिछोटे को सूचना दी।
एसडीओपी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी जिसके बाद कोतवाली सीएसपी राहुल देशमुख और माधवनगर सीएसपी दीपिका शिंदे अपनी टीम के साथ बैंक शाखा पहुंचे। अधिकारियों ने विश्वास में लेकर चर्चा की तो उन्होंने घटना बता दी। इसके बाद अधिकारियों ने बताया कि यह कॉल और दस्तावेज फर्जी हैं जो सायबर ठगों ने भेजे हैं, उन्हें गिरफ्तारी का कोई खतरा नहीं और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस तरह पुलिस अधिकारियों ने उनकी पत्नी को भी इसकी जानकारी देते हुए डिजिटल अरेस्ट से मुक्त करवाते हुए ३ लाख रुपए की ठगी से बचाया।









