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राजसी सवारी : रामघाट क्षेत्र कराया खाली

सुबह से ही महाकाल मंदिर, सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ कालभैरव पर दर्शनार्थियों की भीड़, जाम के हालात भी बने

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान महाकाल की सावन भादौ माह की अंतिम सवारी सोमवार को निकलेगी। इसे राजसी सवारी भी कहते हैं। रविवार को सवारी की तैयारी में प्रशासनिक अमला लगा रहा। सुबह शिप्रा के दोनों किनारे साफ करवाए गए। सवारी मार्ग पर बैरिकेडिंग चलती रही। रविवार को भी शहर में श्रद्धालुओं की भीड़ खूब रही। प्रमुख मंदिरों पर लंबी कतारें थीं। बाजारों में ई-रिक्शा और बाहरी वाहनों के कारण जाम के हालात थे।

चार दिन के लंबे वीकेंड के कारण धार्मिक यात्रा पर आए दर्शनार्थियों के कारण होटल-लॉज, ट्रेनें, बसें फुल हैं। भगवान महाकाल की राजसी सवारी के लिए भी लाखों की संख्या में दर्शनार्थी उज्जैन आएंगे। रविवार को महाकाल मंदिर पर सुबह से ही खासी भीड़ थी। आम दर्शनार्थियों को कार्तिक मंडप, गणेश मंडप से अलग-अलग दर्शन कराया जा रहा है। महाकाल मंदिर पहुंचने के सभी मार्ग और रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के रास्त फुल थे। सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ, कालभैरव मंदिर पर रविवार को श्रद्धालओं की भीड़ थी।

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70 भजन मंडलियां शामिल होंगी
राजसी सवारी में पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव, नंदी रथ पर श्री उमा महेश, रथ पर श्री होलकर स्टेट और रथ पर श्री सप्तधान मुखारबिंद के रूप में विराजित होकर निकलेंगे। इसके अलावा ७० भजन मंडलियां भी सवारी में शामिल होकर भव्यता देंगे।

4 बजे निकलेगी सवारी, रात 10 बजे लौटेगी
राजसी सवारी के लिए भगवान महाकाल की पालकी सभामंडप में पूजन उपरांत शाम 4 बजे मंदिर से निकलेगी और निर्धारित मार्ग से होते हुए रात 10 बजे तक मंदिर लौटेगी। इस बार सवारी अपने निर्धारित मार्ग के अलावा ढाबा रोड से तेलीवाड़ा, कंठाल चौराहा, सतीगेट, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंचेगी। इस नए मार्ग पर भी प्रशासन ने रविवार से बैरिकेडिंग शुरू कर दी।

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