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विषुवत रेखा पर गमन करती दिखी शंकु की छाया, बीच-बीच में बादलों की दस्तक

आज 12-12 घंटे के दिन और रात, साल में दो बार विषुवत रेखा पर लंबवत् रहता है सूर्य, रात को चंद्रमा के नीचे दिखेगा बृ़हस्पति

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शासकीय जीवाजी वेधशाला में खगोलीय घटना को निहारने पहुंचे शहरवासी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सोमवार को शहरवासी अद्भुत खगोलीय घटना के साक्षी बने। दिन और रात बराबर यानी 12-12 घंटे के होने पर वेधशाला में शंकु की छाया दिनभर सीधी रेखा (विषुवत रेखा) पर गमन करती दिखाई दी। वहीं नाड़ीवलय यंत्र के उत्तर और दक्षिणी भाग पर धूप नजर नहीं आई। हालांकि, बीच-बीच में बादलों की आंखमिचौली भी चलती रही जिसके कारण बाधा हुई। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया 24 सितंबर से सूर्य दक्षिणी गोलाद्र्ध में प्रवेश करेगा जिससे दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगेंगी। साथ ही उत्तरी गोलाद्र्ध में धूप के तल्ख तेवर कम होने लगेंगे जिसे शरद ऋतु की शुरुआत भी माना जाता है।
यह स्थिति 21 दिसंबर तक रहेगी। इस दिन भारत सहित उत्तरी गोलाद्र्ध में दिन सबसे छोटा और रात सबसे बड़ी होगी।

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चमकता दिखेगा बृहस्पति ग्रह

सोमवार को रात में भी एक और खगोलीय घटना होगी। आसमान में चंद्रमा और बृहस्पति की युति यानी दोनों पास-पास नजर आएंगे। यह स्थिति रात 11 बजे के बाद बनेगी जब चंद्रमा के नीचे की ओर बृहस्पति ग्रह चमकता हुआ दिखाई देगा। इसे निहारने के लिए किसी साधन की जरूरत नहीं होगी। सामान्य आंखों से इसे देख सकेंगे।

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