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नौ माह से पर्दे में ‘शंभू’

कोठी रोड स्थित विक्रम कीर्ति मंदिर परिसर में रखी है देवाधिदेव की प्रतिमा, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कलाकार और टीम ने बनाई

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ऊंचाई- 12 फीट चौड़ाई- 5 फीट वजन- 14 टन

कितने समय में बनी- 7 माह

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कौन सा पत्थर बंशी पहाड़

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कोठी रोड स्थित विक्रम कीर्ति मंदिर में पिछले ९ माह से देवाधिदेव महादेव पर्दे में हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कलाकार और उनकी टीम द्वारा महीनों की अथक मेहनत के बाद पत्थर को तराश कर भगवान शिव की इस प्रतिमा को आकार दिया गया था, बताया गया था कि बनने के बाद इसे श्री महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी और उदासीनता के चलते अब तक यह प्रतिमा विक्रम कीर्ति मंदिर परिसर में उसी हालत में ढंककर रखी हुई है।

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दरअसल, राजस्थान से मंगवाए गए बंशी पहाड़ के 40 टन वजनी पत्थर से इस 14 टन वजनी प्रतिमा को तैयार किया गया है जो ध्यान मुद्रा में है। 12 फीट ऊंची और 5 फीट चौड़ी इस प्रतिमा को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित ओडिशा के कलाकार अक्षय महाराणा और उनकी टीम के सदस्य आदित्य महाराणा, आशुतोष महाराणा और पांडव महाराणा ने मिलकर तराशा है। मूर्ति को बनाने में करीब 7 माह का समय लगा।

राजस्थान से आया था पत्थर
जि स पत्थर को तराशकर भगवान शिव की प्रतिमा तैयार की गई है। वह राजस्थान से मंगवाया गया है। लाल रंग के इस बंशी पहाड़ पत्थर की खासियत यह है कि यह काफी मजबूत होता है और इससे बनाई गई प्रतिमाओं को कई सालों तक कुछ नहीं होता। दरअसल, 28 मई 2023 में आंधी-तूफान के चलते महाकाल लोक में लगी सप्त ऋषियों की 7 में से 6 प्रतिमाएं गिरकर खंडित हो गई थीं जिसके बाद कई जगह लगाने के लिए ताबड़तोड़ पत्थरों से बनी प्रतिमाएं तैयार करवाई गई थीं।

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