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सजे दरबार, मां के शुभ आगमन को शहर तैयार

देवी मंदिरों में लाइटिंग और सजावट का काम पूरा, गरबा की तैयारियां अंतिम दौर में

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शारदीय नवरात्रि महापर्व गुरुवार से शुरू हो रहा है। मां के शुभ आगमन के लिए शहर तैयार है। देवी मंदिरों में सजावट और लाइटिंग का काम लगभग पूरा हो चुकी है, वहीं अलग-अलग स्थानों पर होने वाले गरबा आयोजन की तैयारियां भी अंतिम दौर में है। बाजार में पूजन सामग्री, दीपक, माता की मूर्तियों और हारफूल की दुकानें सज गई हैं। गुरुवार को शुभ मुहूर्त में मां की घटस्थापना के साथ नौ दिवसीय उत्सव का उल्लास छा जाएगा।

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 3 अक्टूबर को हस्त नक्षत्र और ऐंद्र योग में घटस्थापना होगी। मां पालकी में सवार होकर आएंगी। इस दिन बनने वाले हस्त नक्षत्र का योग अच्छा माना जाता है जो ज्ञान, समृद्धि एवं दीर्घायु का कारक ग्रह है। इसके अलावा 5, 7 और 12 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि और 5 6, 11 और 12 अक्टूबर को रवि योग का संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग व्यापार, व्यवसाय, नए कार्य, सामग्री खरीदी के लिए शुभ माना जाता है। वहीं रवि योग में रजिस्ट्री, इंश्योरेंस, नए वाहन की खरीदी जैसे काम किए जा सकते हैं।

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100 से हजारों रु. की मूर्तियां

नवरात्रि के लिए बाजार भी सजकर तैयार हैं। बाजार में घरों और पांडालों में विराजित की जाने वाले हर साइज की मूर्तियां उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 100 रुपए से लेकर हजारों रुपए तक है। आगर रोड पर दुकान लगाने वाले मानस गुरु एवं कपिल गुरु ने बताया कि 2 फीट की मूर्ति 1100 रुपए, 3 फीट 3100, 4 फीट 5100 और 5 फीट की मूर्ति की कीमत 6100 रुपए है। इसके अलावा फ्रीगंज में भी मूर्तियों और पूजन सामग्रियों की दुकानें सज गई हैं।

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चामुंडा माता मंदिर में हवन

प्राचीन चामुंडा माता मंदिर में नवरात्रि में नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। प्रतिदिन हवन और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पं. शरद चौबे ने बताया कि सुबह 5  बजे से रात 11 बजे तक निरंतर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाएगा। मंदिर पर सजावट और लाइटिंग का काम पूरा हो चुका है।

कोलकाता के 12 कलाकार, 2  माह की अथक मेहनत, फिर दिया मां की मूर्तियों को आकार

नवरात्र उत्सव के लिए मूर्तिकार देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पश्चिम बंगाल के मूर्तिकारों ने चार महीने पहले से मूर्तियां बनाने का काम शुरू कर दिया था। पहले गणेश उत्सव और अब नवरात्र के लिए कारीगरों ने दिन-रात की मेहनत के बाद मूर्तियों को आकार दिया।

कोलकाता के मूर्तिकार विजय पाल ने बताया कि मूर्तियां बनाने के लिए गंगा नदी की मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। 12 कलाकारों ने 2 माह की मेहनत के बाद इन्हें तैयार किया है। इनकी कीमत 8 से लेकर 80 हजार रुपए तक है। अभी रतलाम, जावरा, इंदौर, देवास सहित कई जगह के ऑर्डर हंै। सामग्री के दामों में वृद्धि के साथ ही कारीगरों की मजदूरी भी डबल हो गई है जिससे मूर्तियों की कीमतों में इजाफा हुआ है।

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