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सिग्नल बदहाल, ट्रैफिक बेहाल

प्रमुख चौराहों के सिग्नल कई दिनों से बंद, यातायात पुलिस के जवान भी नहीं होते

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उज्जैन। शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात को कंट्रोल करने के लिए लगे ट्रैफिक सिग्नल इन दिनों बंद हैं। ना सिग्नल की लाइट रेड हो रही है, ना ही ग्रीन सिग्नल है। ऐसे में यातायात बेहाल हो गया। वाहन चालक चारों तरफ से बेरोकटोक निकल रहे हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। इधर, पहले की बात की जाए तो विभिन्न चौराहों पर ट्रैफिक जवानों की ड्यूटी होती थी, जो सिग्नल बंद होने की स्थिति में यातायात को कंट्रोल करते थे लेकिन अब चौराहों पर जवान तैनात नहीं रहते जिसके कारण ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह से फेल हो चुका है। बहरहाल, बुधवार को अक्षरविश्व टीम चार प्रमुख चौराहों का जायजा लेने पहुंची तो हालात बद से बदत्तर नजर आए।

यहां लगा सिग्नल एक माह से ज्यादा समय से बंद है। इसे टाटा कंपनी द्वारा सीवरेज प्रोजेक्ट के काम शुरू होने पर बंद किया गया था जिसके बाद से यह शुरू नहीं हो सका। सिग्नल के रूप में केवल यलो लाइट ब्लिंक करती है। इसके चलते वाहन चालक भी चारों ओर से एक ही समय पर बेरोकटोक निकल रहे हैं।

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शहर के व्यस्ततम चौराहों में से एक है। यह चौराहा नए और पुराने शहर को जोड़ता भी है। यहां भी लंबे समय से टै्रफिक सिग्नल बंद है जिसके चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। यहां से अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बसें भी चलती हैं। ऐसे में सिग्नल का चालू होना और ट्रैफिक जवानों का होना बेहद जरूरी है।

रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड होने से इस चौराहे पर हमेशा यातायात का दबाव रहता है। पैसेंजर और बसों की आवाजाही दिनभर चलती रहती है। इतना महत्वपूर्ण चौराहा होने के बाद भी यहां लगा सिग्नल काफी दिनों से बंद पड़ा है। ऐसे में अस्त-व्यस्त यातायात के चलते हमेशा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

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इसका शुमार भी व्यस्ततम चौराहों में शामिल है लेकिन यहां भी ट्रैफिक सिग्नल मनमौजी बना हुआ है। कभी वह अपने आप चालू हो जाता है तो कभी बंद हो जाता है। ऐसे में चारों ओर से वाहन बिना रुके बेधडक़ निकलते रहते हैं जिससे कई बार हादसे भी हो चुके हैं। बावजूद इसके मेंटनेंस की ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है।

पहले तैनात रहते थे ट्रैफिक जवान
पहले की बात की जाए तो हर चौराहों पर ट्रैफिक जवानों की ड्यूटी होती थी। सिग्नल बंद होने की स्थिति में जवान एक्शन में आ जाते थे और ट्रैफिक मैनेज करते थे जिससे ना तो नियम टूटते थे और दुर्घटनाओं की संभावना भी काफी कम होती थी लेकिन जब से टाइमर वाले नए सिग्नल लगाए गए हैं तब से जवानों को चौराहों से हटा लिया गया है।

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