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सोशल मीडिया साहित्यकारों का प्रतिस्पर्धी नहीं मददगार

जाने-माने साहित्यकार प्रयाग शुक्ल से अक्षरविश्व की विशेष चर्चा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सोशल मीडिया साहित्यकारों का प्रतिस्पर्धी नहीं मददगार है। मौजूदा समय में सोशल मीडिया साहित्यकारों की काफी मदद कर रहा है। ऐसे साहित्यकार जिनकी रचनाओं को पहले प्रकाशक नहीं मिलते थे, अब उन्हें सोशल मीडिया के सहारे प्रकाशक ढूंढ कर प्लेटफार्म दे रहे हैं। कोलकाता की ज्योत्सना बैनर्जी इसका उदाहरण है, जिनकी रचनाएं फेसबुक पर आईं तो प्रकाशक उनका घर ढूंढते हुए पहुंच गए।

यह कहना है जाने-माने साहित्यकार प्रयाग शुक्ल का। वह उज्जैन में साहित्यकार गौरागोयल की पुस्तकों के विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने आए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने अक्षरविश्व प्रतिनिधि से भी चर्चा की। कोलकाता में जन्मे शुक्ल ने कहा कि अगर आपकी कविता में दम है तो उसे सोशल मीडिया में भी जगह मिलती है और किताबों और प्रिंट मीडिया में भी। सोशल मीडिया के कारण साहित्यकारों को नुकसान नहीं लाभ हो रहा है। इस माध्यम की वजह से साहित्यकार आज घर-घर तक पहुंच रहे हैं। जहां तक हिंदी साहित्य में पाठक कम होने की बात है तो यह भी गलत है, क्योंकि हिंदी साहित्य को पाठक खूब पढ़ रहे हैं।

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पुस्तक मेले में पैर रखने की जगह नहीं होती
कविता संभव, यह एक दिन है, अधूरी चीजें तमाम,काव्य संग्रह, अकेली आकृतियां, काई जैसी कहानी , गठरी, आज और कल उपन्यास के लेखक शुक्ल ने बताया कि विश्व पुस्तक मेले में आज पैर रखने की जगह तक नहीं होती। लाखों लोग आते हैं। राजकमल प्रकाशन के स्टाल पर तो कतार लगी रहती है। साहित्य की मांग को इससे ही समझ सकते हैं कि मेरे कविता संग्रह के तीसरे संस्करण का प्रकाशन वाणी प्रकाशन ने किया है। विश्वविद्यालयों में हिंदी साहित्य पढ़ा और पढ़ाया जा रहा है। आज 80 साल की गौरा गोयल लिख-पढ़ रही है।

गौरा गोयल की पुस्तक का विमोचन एवं काव्यपाठ समारोह आज
उज्जैन। साहित्यकार गौरा गोयल के निबंध संग्रह चिंतन धारा और काव्य संग्रह आत्मगुंजन का विमोचन समारोह और काव्यपाठ रविवार शाम 5 बजे भरतपुरी प्रशासनिक जोन स्थित मध्यप्रदेश सामाजिक विज्ञान एवं शोध संस्थान ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के अतिथि वरिष्ठ कला समीक्षक, कवि एवं कथाकार प्रयाग शुक्ल और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आचार्य सूर्यप्रकाश व्यास होंगे। आयोजकों ने कार्यक्रम में शिरकत करने की अपील साहित्यप्रेमियों से की है।

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नाटकों में भी भीड़ बढ़ रही है
शुक्ल ने कहा कि यही स्थिति नाटकों की है। आज नाटकों में दर्शकों की भीड़ है। मुंबई में तो लोग फिल्म की तरह मराठी नाटक देख रहे हैं। उनकी रुचि का आलम यह है कि ३०० रुपए टिकट होने के बावजूद हॉल भरे हुए हैं। दरअसल साहित्य और नाटकों में पाठक और दर्शक कम होने की गलत धारणा फैलाई जा रही है। यह बंद होना चाहिए।

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