शहर तीन माह से पी रहा टेबलेट्स से साफ किया पानी

पीएचई को ठेकेदार ने क्लोरीन सिलेंडर सप्लाय किया बंद, गुणवत्ता संदेह के घेरे में
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। गनीमत है शहर के लोगों की सेहत ठीक है। वरना नगर निगम के जिम्मेदारों ने तो सेहत बिगाडऩे में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। सेहत का राज पानी है, बीमारियों की जड़ प्रदूषित पानी है। शहर के बाशिंदे जो पानी पी रहे हैं इसमें वह क्लोरीन नहीं है जो होता है। क्लोरीन की टेबलेट से काम चलाया जा रहा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नगर निगम ने क्लोरीन के सिलेंडर सप्लाय करने वाले ठेकेदार को भुगतान नहीं किया। वह भी अड़ गया। सप्लाय बंद कर दी। यानी पानी में निश्चित मात्रा वाला क्लोरीन नहीं है।
इन जगह हैं फिल्टर प्लांट…
श हर में जलप्रदाय के लिए पीएचई के पास चार मुख्य स्त्रोत हैं जिनमें गंभीर डेम, शिप्रा नदी, उंडासा तालाब और साहेबखेड़ी तालाब। मुख्य स्त्रोत गंभीर डेम से पानी लेकर अंबोदिया फिल्टर प्लांट पर ट्रिटमेंट के बाद सप्लाय के लिए शहर की पेयजल टंकियों तक लाया जाता है, जबकि गऊघाट फिल्टर प्लांट पर भी वर्तमान में गंभीर से पानी लाकर ट्रिटमेंट किया जा रहा है। उण्डासा व साहेबखेड़ी का पानी वहीं फिल्टर कर जलप्रदाय किया जाता है।
प्लांट्स पर ऐसे साफ होता है जलप्रदाय योग्य पानी
नदी या तालाब से पानी लेकर उसे पहले फिल्टर करने की प्रक्रिया होती है। जब प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो उसे जलप्रदाय योग्य माना जाता है। पीएचई के केमिस्ट हरिसिंह मोरे बताते हैं कि पानी को पूरी तरह साफ करने के लिए एलम, ब्लिचिंग से साफ करने के बाद पानी को डिस्इंफेक्शन करने हेतु उसमें क्लोरीन मिलाना होता है। इससे पानी में मौजूद कीटाणु खत्म हो जाते हैं और पानी पीने योग्य हो जाता है।
टेंडर निकाला, माल लिया लेकिन भुगतान नहीं
पीएचई से मिली जानकारी के अनुसार पानी के कीटाणु खत्म करने के लिए उपयोग किए जाने वाले क्लोरीन सिलेंडर सप्लाय के लिए टेंडर निकाला जाता है। पिछले ठेकेदार का 5 लाख रुपए से अधिक भुगतान नहीं हुआ तो उसने तीन माह पहले ही सप्लाय बंद कर दी। तभी से इमरजेंसी में उपयोग की जाने वाली क्लोरीन टेबलेट्स का उपयोग कर रहे हैं।
यह अंतर है टेबलेट्स और सिलेंडर में
सिलेंडर में जो क्लोरीन आता है वह लिक्विड फॉर्म में होता है। पानी में तुरंत घुलनशील होता है और इसमें क्लोरीन की मात्रा 99.99 प्रतिशत होती है। इसे पानी में मिलाते ही कीटाणु नष्ट हो जाते हैं, जबकि टेबलेट्स में क्लोरीन की मात्रा 10 प्रतिशत तक होती है। इसे पानी में घुलने में समय लगता है। पीएचई द्वारा पेयजल सप्लाय के दौरान क्लोरीन सिलेंडर खत्म होने की स्थिति में इमरजेंसी के समय एक-दो सप्लाय के लिए टेबलेट्स का उपयोग होता है, लेकिन पीएचई द्वारा वर्तमान में इसका उपयोग तीन माह से किया जा रहा है।
क्या कहते हैं अफसर
मैं गऊंघाट फिल्टर प्लांट का प्रभारी हूं। पानी फिल्टर की प्रक्रिया और उसमें मिलाए जाने वाले केमिकल के संबंध में जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी केमिस्ट बता सकते हैं।
दिलीप नौघाने
प्रभारी गऊघाट फिल्टर प्लांट
गऊघाट के एक प्लांट पर क्लोरीन सिलेंडर का उपयोग हो रहा है। गंभीर, साहेबखेड़ी और उंडासा प्लांट पर क्लोरीन टेबलेट्स से पानी डिस्इंफेक्टिव किया जा रहा है। क्लोरीन सिलेंडर का सप्लाय ठेकेदार द्वारा नहीं किया जा रहा। नए टेंडर निकाले हैं उसके बाद
ही क्लोरीन सिलेंडर का उपयोग हो पाएगा।
हरिसिंह मोरे, केमिस्ट पीएचई
क्लोरीन सिलेंडर के समान ही क्लोरीन टेबलेट्स भी काम करती है। पानी फिल्टर के बाद चेक किया जाता है। उसके बाद ही जलप्रदाय कर रहे हैं।हमारे टेंडर लग चुके हैं। शीघ्र क्लोरीन सिलेंडर सप्लाय शुरू हो जाएगा।
एन.के. भास्कर, कार्यपालन यंत्री
पीएचई









