Advertisement

सीएम ने पहले दी हिदायत, फिर ताबड़तोड़ दिए इंजीनियर

उज्जैन को मेट्रो सिटी बनाने की कवायद कर रही सरकार, सिंहस्थ कार्यों की मॉनिटरिंग अब सीएम हाउस से

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Advertisement

सड़क चौड़ीकरण काम में लेटलतीफी पर जताई नाराजगी, नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण में  5इंजीनियरों की पदस्थी, बाकी की नियुक्ति जल्द

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन को मेट्रो सिटी बनाने के कवायद कर रही राज्य सरकार अब सिंहस्थ कार्यों की मॉनिटरिंग सीएम हाउस से करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन नगर निगम सभाकक्ष में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और प्रस्तावित विकास कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा में पहले अफसरों को हिदायत दी और फिर ताबड़तोड़ इंजीनियर भी भेज दिए। नगर निगम के साथ उज्जैन विकास प्राधिकरण में भी इंजीनियिरों की पदस्थी की गई है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सिंहस्थ मध्यप्रदेश की साख का प्रतीक है। उज्जैन को मेट्रो शहर के रूप में स्थापित करना है। सभी निर्माण कार्य आधुनिकता और गुणवत्ता के साथ किए जाएं। इन कामों को तय समय में पूरा करें। अगर अफसर सक्षम नहीं हैं तो नए अफसर भेज दिए जाएंगे।

Advertisement

दरअसल, सिंहस्थ के बड़े काम उज्जैन विकास प्राधिकरण और नगरनिगम के पास हैं। इनमें सड़क चौड़ीकरण के काम भी हैं। चौड़ीकरण के अधिकतर काम नगर निगम के जिम्मे हैं। यहां इंजीनियरों की काफी कमी है। ऐसे में चौड़ीकरण काम को लेकर दिक्कत हो रही है। खासकर पुराने शहर में। यहां गाड़ी अड्डा- तेलीवाड़ा, कोयलाफाटक-कंठाल चौराहा, निकास चौराहा-केडी गेट, गदापुलिया-जयसिंहपुरा जैसी सड़कें लंबे समय से खुदी पड़ी हैं। यहां ना तो सड़क बन रही हंै और ना नालियां। नल कनेक्शन भी खुले पड़े हैं। ऐसे में रहवासियों को काफी दिक्कत हो रही है। धूल, गंदगी, सीवरेज के बीच से लोग गुजर रहे हैं और प्रशासन को कोस रहे हैं। यह बातें ऊपर तक भी पहुंच रही हैं। इसे लेकर ही सीएम डॉ. मोहन यादव नाराज थे। उन्होंने अफसरों से साफ कहा सिंहस्थ के काम क्वालिटी वाले और समयसीमा में होने हैं। ऐसे में लापरवाही सहन नहीं होगी।

यह इंजीनियर मिले

Advertisement

सीएम की मीटिंग के बाद नगर निगम और यूडीए में इंजीनियरों की पदस्थापना के ऑर्डर भी जारी हो गए। नगर निगम की सिंहस्थ सेल में दतिया आरईएस के सहायक यंत्री हिमांशु तिवारी को कार्यपालन यंत्री (ईई) और पॉवर जनरेटिंग कंपनी के सहायक यंत्री राजेश कुमार जैन को कार्यपालन यंत्री (ईई) पदस्थ किया गया है। निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा ने 5 इंजीनियरों की डिमांड की थी। मिश्रा ने बताया कि चौड़ीकरण काम में लगे इंजीनियरों पर वर्कलोड अधिक है। दो से तीन लोग इसे देख रहे हैं। कोशिश है कि एक इंजीनियर के पास दो से ज्यादा सड़क ना हों। इसका असर काम की गति पर दिखेगा। इधर, यूडीए में भी खाली पदों पर इंजीनियरों की तैनाती कर दी गई। पहली किस्त में प्राधिकरण को दो उपयंत्री व एक सहायक यंत्री मिले हैं। भिंड से उपयंत्री अवनीश ठाकुर, नर्मदापुरम के अंबक पाराशर और जावरा से शुभम सोनी को सहायक यंत्री के तौर पर पदस्थ किया गया है।

रिवर्स कैलेंडर से होगा काम, सीएम हाउस में बनेगा सिंहस्थ सेल

सीएम ने कहा कि अब रिवर्स कैलेंडर (उल्टी गिनती) बनाकर युद्ध स्तर पर काम शुरू करें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ से पहले केवल दो वर्षाकाल शेष हैं। दिल्ली और भोपाल की तर्ज पर अब मुख्यमंत्री निवास से भी सिंहस्थ की मॉनिटरिंग होगी। इसके लिए विशेष सिंहस्थ सेल गठित होगा। अब माइक्रो मैनेजमेंट नहीं, बल्कि नैनो मैनेजमेंट का समय है। अधिकारी 24&7 सक्रिय रहें।

सिंचाई के लिए मिलेगा नर्मदा जल
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री संवेदनशील भी नजर आए। उन्होंने घाट निर्माण का असर किसानों की गेहूं फसल पर नहीं होने देने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सिंचाई के लिए पानी की कमी न हो। शिप्रा में नर्मदा जल की निरंतर आपूर्ति हो।

सीएम के मुख्य दिशा निर्देश: नैनो मैनेजमेंट से संवरेंगे सिंहस्थ के इंतजाम

होम स्टे और प्रशिक्षण-शहर के आसपास के गांवों में होम स्टे विकसित करें और ग्रामीणों को इसके लिए प्रशिक्षित करें।

त्योहारों से लें सीख- महाशिवरात्रि, श्रावण और नागपंचमी जैसे पर्वों की व्यवस्था को ट्रॉयल रन के रूप में लें। यहां के अनुभवों से सिंहस्थ की भीड़ प्रबंधन योजना बनाएं।

गूगल मैपिंग और वैकल्पिक मार्ग- शहर को अन्य जिलों से जोडऩे वाले वैकल्पिक रास्तों को चिह्नित कर उन्हें गूगल मैप पर अपडेट करें। महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए नए वैकल्पिक मार्गों का चयन करें ताकि मुख्य रास्तों पर भीड़ का दबाव न बढ़े।

प्रोत्साहन- जो निर्माण एजेंसियां समय सीमा से पहले और उच्च गुणवत्ता का कार्य करेंगी, उन्हें सरकार पुरस्कृत करेगी।

घाटों का कायाकल्प- श्री मंगलनाथ, भूखीमाता और रामघाट के आसपास के घाटों को जोडऩे वाले मार्गों को चिह्नित कर उन्हें विकसित कर तुरंत शुरू करें।

संस्थाओं को प्रोत्साहन- मेला क्षेत्र के बाहर सामुदायिक भवन, स्कूल और धर्मशाला बनाने वाली संस्थाओं को सरकार प्रोत्साहित करेगी।

Related Articles

Write a review