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उज्जैन में देश का पहला वीर भारत संग्रहालय बनेगा लेकिन कोठी पैलेस ही नहीं मिला!

कोठी पैलेस ही नहीं मिला!

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प्रशासन ने चाबियां सौंपी, अधिकृत पत्र नहीं दिया, स्मार्ट सिटी को दिया

 

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:ऐतिहासिक महत्व के सिंधिया रियासतकाल के कोठी पैलेस को देश का पहला वीर भारत संग्रहालय बनाने का सरकार ने निर्णय लिया है, लेकिन इसका काम सुस्त पड़ गया है। बड़ी वजह यह कि अब तक इसे संस्कृति विभाग को हैंडओवर ही नहीं किया जा सका है। ऐसे में सिंहस्थ से पहले इसे संग्रहालय का रूप देने में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

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कोठी पैलेस, जहां कभी जिला न्यायालय और कलेक्टर व कमिश्नर के दफ्तर लगते थे, वहां अब लोग अपने इतिहास को जान सकेंगे। प्रदेश सरकार ने कोठी पैलेस पर वीर भारत संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया है। सिंहस्थ 2028 से पहले दुनिया के लिए इसे आकर्षण का केंद्र बनाने की योजना है, लेकिन अभी इसका काम शुरू ही नहीं हो सका है। स्मार्ट सिटी को इसका काम सौंपा गया है, लेकिन स्मार्ट सिटी अभी इसके लिए एक ईंट भी नहीं लगा सकी है।

सूत्रों के अनुसार संस्कृति विभाग के अंर्तगत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा इस योजना को आकार दिया जाएगा, लेकिन उसे अभी प्रशासन की ओर से केवल चाबियां मिली हैं लेकिन औपचारिक रूप से न हैंडओवर हुआ है न कोई पत्र सौंपा गया है। इस कारण संस्कृति विभाग भी कोई काम शुरू नहीं कर सका है। सिंहस्थ से पहले इसे तैयार करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। कोठी पैलेस की इमारत वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण है।

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जीर्णोद्धार का काम बाकी

माधवराव सिंधिया के शासनकाल में ब्रिटिश रिजेंसी काउंसिल की मदद से 1888 में इसे बनाया गया था। कहते हैं सिंधिया रियासत के समय इसे रॉयल पैलेस बनाने की योजना थी, लेकिन सिंधिया शासनकाल की राजधानी ग्वालियर चली गई। इस कारण इसका उपयोग नहीं हो सका। नक्काशीदार पत्थरों से इसे बनाया गया था, जो आज भी मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसमें देश का पहला वीर भारत संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया है। विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी को वीर भारत संग्रहालय न्यास का सचिव बनाया है। न्यास ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। भवन के जीर्णोद्धार का काम अभी शुरू होना बाकी है।

30 हजार साल पुराना इतिहास भी देख सकेंगे लोग

योजना साकार होने के बाद 30 हजार साल पुराना इतिहास इसमें संजोया जाएगा। देश के अनेक महानायकों के बारे में यहां जाना जा सकेगा। ब्रह्मा से लेकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कहानियां रहेंगी, जिन्हें आधुनिक माध्यमों से जान सकेंगे। श्रीराम की 96 पीढिय़ों सहित वैदिक, उत्तर वैदिक के नायकों का चित्रण भी देखा जा सकेगा। देश को गौरवान्वित करने वाले तेजस्वी नायकों, सत्पुरुषों की प्ररेक कथा, उनके चरित्रों का चित्रांकन पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों से किया जाएगा। वैदिक काल परंपरा, खगोल विज्ञान जैसी कई पुरानी कला और परंपरा के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

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