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महाकाल मंदिर की गोशाला अब 10 हेक्टेयर जमीन पर बनेगी

प्रशासन ने बामोरा गांव में जमीन आवंटित की, बन रही आधुनिक योजना

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अभी सिर्फ दो बीघा जमीन पर चल रही गोशाला

सुधीर नागर उज्जैन। महाकाल मंदिर प्रशासन अब 10 हेक्टेयर से अधिक (40 बीघा) जमीन पर आधुनिक गोशाला का संचालन करेगा। प्रशासन ने इसके लिए जमीन आवंटित कर दी है और इसके निर्माण की योजना बनाना शुरू कर दी है। ड्राइंग और डिजाइन बनने के बाद इसका काम शुरू होगा।

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उज्जैन से करीब 26 किमी दूर बामोरा गांव में 10.5 हेक्टेयर जमीन पर महाकाल मंदिर की भव्य और आधुनिक गोशाला बनने जा रही है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने बैठक में गोशाला के विस्तार का निर्णय लिया गया था। कलेक्टर और मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष नीरजकुमार सिंह ने जमीन का चयन कर आवंटन कर दिया है। अभी इसकी पूरी योजना तैयार की जा रही है। यह पूरी तरह से आधुनिक होगी और एक हजार से अधिक गायों को रखा जा सकेगा। यह देश की बड़ी गौशालाओं में एक हो सकती है। इसके निर्माण पर होने वाले खर्च के लिए अभी एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है।

अभी चिंतामन में 2 बीघा जमीन पर गोशाला
महाकाल मंदिर अभी चिंतामन गणेश मंदिर के पास करीब दो बीघा जमीन पर गोशाला का संचालन कर रहा है, जहां करीब 250 गोवंश है, जिनमें गाय, नंदी और बछड़े शामिल हैं। दूध देने वाली गायों से 20।लीटर दूध का ही उत्पादन हो पाता है। इसका उपयोग केवल पूजा के लिए किया जाता है। गोशाला छोटी होने से विचरण नहीं कर पातीं। बामोरा में नई गोशाला में गाएं घूम फिर सकेंगी।

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जमीन आवंटित कर दी है
महाकाल मंदिर की गोशाला को बामोरा में शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए बामोरा में 10.5 हेक्टेयर जमीन आवंटित कर दी है। गोशाला की योजना तैयार हो रही है।
नीरजकुमार सिंह
कलेक्टर एवं अध्यक्ष महाकाल मंदिर प्रबंध समिति

तिरुपति मंदिर की तर्ज पर होगी गोशाला

महाकाल मंदिर की गोशाला भी तिरुपति मंदिर की तर्ज पर होगी। तिरुपति तिरुमला देवस्थानम ट्रस्ट अभी 1 हजार गायों की गोशाला चलाता है जहां रोज 800 लीटर दूध का उत्पादन करता है। इससे बनने वाले घी का उपयोग पूजा के लिए किया जाता है। महाकाल मंदिर प्रशासन भी इसी तरह आधुनिक गोशाला स्थापित करेगा।

मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी गोशाला ग्वालियर के लाल टिपारा में है जहां 10 हजार गाएं हैं और नगर निगम द्वारा इसका संचालन संतों की टीम के माध्यम से होता है।

सागर के देवल में 360 एकड़ जमीन पर भी पुरानी गोशाला थी, जिसे अंग्रेजों ने स्थापित की थी। 1990 में यह बंद हो गई।

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