महाकाल दर्शन के नाम पर अवैध कमाई करने वालों के परिवार भी जांच के घेरे में

अवैध कमाई के सबूत मोबाइल से डिलीट कर दिए आरोपियों ने
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अभिषेक भार्गव फिर एक दिन के पुलिस रिमांड पर
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। वर्षों से एक ही पद पर बैठे महाकालेश्वर मंदिर समिति के कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए मंदिर को इस तरह कमाई का जरिया बनाया कि सभी करोड़पति हो गए। 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह कमाने वाले कर्मचारियों की संपत्ति, बैंक खाते और मोबाइल डाटा की जांच में पुलिस टीम जुटी तो कई चांैकाने वाली जानकारियां मिलीं। खास बात यह कि आरोपियों ने अपने-अपने मोबाइल की चेटिंग, लेनदेन का डाटा भी डिलीट कर दिया। उन्हें पता था कि यह डाटा उनका भविष्य बिगाड़ देगा। लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि आईटी इंजीनियर और साइबर सेल के तकनीशियन मुर्दे के फेफड़े कब्र से खोद कर निकाल लेंगे।
ऐसे खुली थी पोल
कलेक्टर नीरज कुमार सिंह द्वारा नंदीगृह में बिना परमिशन दर्शनों के लिए पहुंचे गुजरात व उत्तरप्रदेश के लोगों को पकड़ कर महाकाल थाना पुलिस के सुपुर्द कराया था। पुलिस ने उक्त लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि पुजारी, पुरोहित और सेवादार द्वारा 1100 रुपए प्रति व्यक्ति लेकर नंदीगृह से दर्शन और जलाभिषेक के लिए भेजा था। पुलिस ने सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल की रिपोर्ट पर तीनों लोगों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया। यहीं से मंदिर में लेनदेन कर दर्शन कराने का खुलासा हुआ था।
अभिषेक कोठी परिसर में चर्चित रहा
अभिषेक भार्गव का प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में जलवा रहा है। जब उसे कोर्ट में पेश किया गया तब उसका चेहरा उतरा हुआ था। चर्चा यह भी रही कि वह एडीएम के पास वाले कक्ष में बैठ कर अपनी योजना को अंजाम देता था और किसी को पता नहीं चला कि वह क्या कर रहा है। यदि एडीएम की नजर की टेड़ी नजर उस पर पड़ जाती तो वह अब तक जेल की सलाखों के पीछे रहता।
समिति के कर्मचारियों ने बताए थे साथियों के नाम
महाकालेश्वर मंदिर में नंदीगृह, गर्भगृह की देहरी से दर्शन कराने, भगवान का जलाभिषेक कराने के साथ ही भस्मार्ती दर्शन के नाम पर कर्मचारियों द्वारा श्रद्धालुओं से रुपए का लेनदेन किया जा रहा था। कलेक्टर ने इसकी जांच कराई तो पता चला नंदीगृह प्रभारी राकेश श्रीवास्तव और सफाई निरीक्षक विनोद चौकसे द्वारा रैकेट चलाया जा रहा है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर उनके मोबाइल जब्त किए। उनकी संपत्ति की जांच भी की। रिमांड के दौरान उन्होंने अपने साथियों के नाम पुलिस को बताए थे।
पूछताछ में नहीं कर रहे सहयोग
पुलिस ने राकेश और विनोद द्वारा बताए साथियों के नामों में से अभिषेक भार्गव, राजकुमार सिंह, राजेंद्र सिसौदिया, क्रिस्टल कंपनी के सुरक्षाकर्मी जीतेंद्र पंवार और ओमप्रकाश मालवीय को गिरफ्तार किया जबकि मंदिर समिति का कर्मचारी रितेश शर्मा फरार है। पुलिस ने पांचों से अलग-अलग पूछताछ की लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। पुलिस द्वारा आरोपियों व उनके परिजनों के खातों की जांच के लिए बैंकों को पत्र लिख रही है। इनकी प्रॉपर्टी की जांच भी कर रही है। खास बात यह कि राकेश और विनोद की गिरफ्तारी के बाद रैकेट के उक्त सदस्यों को पता चल चुका था कि वह भी गिरफ्तार होंगे। यही कारण रहा कि आरोपियों ने अपने-अपने मोबाइल के डाटा डिलीट कर दिए। हालांकि पुलिस ने इनके मोबाइल जब्त कर लिए हैं जिसका डाटा रिकवरी कराने साइबर सेल भेजा गया है।
संपत्ति जब्ती का कलेक्टर को प्रतिवेदन देंगे
सीएसपी ओमप्रकाश मिश्रा ने बताया आरोपियों के मोबाइल डेटा रिकवर करा रहे हैं। इसके अलावा महाकालेश्वर मंदिर समिति की ओर से इन्हें अब तक मिला वेतन और धोखाधड़ी से अर्जित की गई संपत्ति की जांच भी कर रहे हैं। उक्त लोगों के वेतन से अधिक संपत्ति मिलने पर उसे जब्त करने के लिए कलेक्टर को प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे।
अभिषेक भार्गव का रिमांड बढ़ा
पुलिस ने गिरफ्तार किए अभिषेक भार्गव, राजकुमार सिंह, राजेन्द्र सिसौदिया, क्रिस्टल कंपनी के सुरक्षाकर्मी जितेन्द्र पंवार और ओमप्रकाश मालवीय को कोर्ट में दोबारा पेश किया। इनके लिए न्यायालय से रिमांड मांगा। न्यायालय ने सिर्फ अभिषेक भार्गव का ही एक दिन का रिमांड स्वीकृत किया है। शेष को जेल भेज दिया गया।










