सडक़ें वही रहीं, बस नजरिया बदल गया

खरी-खरी
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विनोदसिंह सोमवंशी । विदिशा-भोपाल सडक़ को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान की मांग इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उन्होंने दो दिन पहले केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने विदिशा-भोपाल मार्ग और विदिशा शहर की सडक़ों की खराब हालत का मुद्दा उठाया था। यह बात यूं तो गलत नहीं लगती लेकिन लोगों के बीच चर्चा इस बात की है आखिर यह बात अब क्यों उठाई गई?

शिवराजसिंह चौहान विदिशा से छह बार सांसद और लगभग 18साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके इतने लंबे कार्यकाल में विदिशा की सडक़ें बनीं भी और बिगड़ीं भी। इसलिए जब आज वही सडक़ें फिर से मुद्दा बनीं तो लोग सोशल मीडिया पर चुटकी लेने से नहीं चूके। किसी ने कहा अब गड्ढे दिखने लगे हैं और कोई कह रहा है पहले क्या रास्ते ठीक थे या नजरें कहीं ओर थीं। इतने लंबे कार्यकाल में भोपाल-विदिशा सडक़ की सुध तब क्यों नहीं ली?
इस पूरे मामले में सीएम डॉ. मोहन यादव का रवैया बेहद संतुलित रहा। उन्होंने बात को टालने, बहस में डालने की बजाय गंभीरता से सुना और समाधान का भरोसा भी दिया। न कोई तीखा जवाब दिया, न पुरानी फाइलें खोलने की कोशिश की। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ भी हुई।
दरअसल राजनीति में भूमिका बदलते ही नजरिया भी बदल जाता है, सत्ता में रहते हुए जो बातें छोटी लगती हैं, सत्ता से बाहर आते ही वही बड़ी दिखने लगती हैं। राजनीति में शिकायत करना बेहद आसान होता है पर जिम्मेदारी निभाना बहुत कठिन। लेकिन इन सबके बीच जनता की अपेक्षा बहुत साफ होती है। उसे बयान, सफाई या बहस नहीं चाहिए। उसे बेहतर सुविधाएं चाहिए। सीएम डॉ. मोहन यादव इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर सडक़ों में सुधार करवा देंगे तो यह फिजूल की चर्चा यूं ही खत्म हो जाएगी, क्योंकि राजनीति में वही याद रखा जाता है जो कहने से ज्यादा काम करके दिखाता है।









