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विक्रमोत्सव का शंखनाद, नमो-नमो शंकरा की गूंज से शिवमय हुई अवंतिका

अंतर्राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ा अवंतिका का सांस्कृतिक वैभव : सीएम

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उज्जैन। विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन में रविवार को विक्रमोत्सव 2026′ का ऐतिहासिक और भव्य शुभारंभ हुआ। पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि यह उत्सव अब देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक-धार्मिक आयोजनों में स्थापित हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एक बड़ी सौगात देते हुए 1 करोड़ 1 लाख रुपये के अंतरराष्ट्रीय विक्रम सम्मान की स्थापना की बात कही। इसके साथ ही 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय स्तर का सम्मान और 5-5 लाख रुपये के तीन राज्य स्तरीय पुरस्कार भी शुरू किए जाएंगे, जो इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर एक नई ऊंचाई प्रदान करेंगे।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रामराज्य की अवधारणा पर आगे बढ़ रहा है और मध्य प्रदेश भी उसी गति से प्रगति पथ पर अग्रसर है। उन्होंने उज्जैन की अनादि परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का काल सुशासन और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक रहा है। वर्ष 2005 से निरंतर आगे बढ़ रहा यह आयोजन अब तक का सबसे बड़ा स्वरूप ले चुका है। सरकार द्वारा वैदिक काल गणना को पुनस्र्थापित करने के लिए नई ऑब्जर्वेटरी की स्थापना का भी विशेष उल्लेख किया गया।

शंखनाद और डमरू वादन से गूंजा परिसर: कार्यक्रम का आरंभ सामूहिक शंखनाद और डमरू वादन की गूंज के साथ हुआ, जिसने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और सम्राट विक्रमादित्य व बाबा महाकाल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण के साथ शुभारंभ किया। इस दौरान अतिथियों का स्वागत महाकाल वन प्रसादम भेंट कर किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था के मेल का एक अनूठा नवाचार है। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, सतीश मालवीय, महापौर मुकेश टटवाल भी मौजूद थे।

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धार्मिक पर्यटन का बढ़ता आकर्षण: मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकाल महालोक के निर्माण के बाद से देश-विदेश के श्रद्धालुओं का आकर्षण उज्जैन की ओर तेजी से बढ़ा है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उमड़ी भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक पर्यटन का विस्तार हो रहा है।

महाकाल की नगरी में पहली बार प्रीतम का शिवोऽहम, सीएम हुए शामिल

उज्जैन। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा आयोजित विक्रमोत्सव 2026 का भव्य आगाज़ हो चुका है। आयोजन के पहले दिन सुबह जहाँ श्रद्धा के साथ कलश यात्रा निकाली गई, वहीं शाम को पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर शिवनाद और संगीत संध्या की प्रस्तुतियों से गुंजायमान रहा। इस विशेष अवसर पर मुंबई के प्रख्यात संगीतकार और गायक प्रीतम ने अपनी टीम के साथ भगवान शिव की महिमा का बखान किया। रात करीब 9.41 बजे जब पॉलिटेक्निक कॉलेज के विशाल मंच पर रंग-बिरंगी रोशनियाँ बिखरीं, तब संगीतकार प्रीतम ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। उन्होंने दर्शकों का अभिवादन करते हुए कहा कि वे महाकाल के दर्शन के लिए कई बार उज्जैन आए हैं, लेकिन इस पवित्र नगरी में शिवोऽहम की प्रस्तुति देने का यह उनका पहला अवसर है। उनके साथी कलाकारों ने देवा देवा… और नमो नमो हे शंकरा जैसे भजनों से वातावरण को पूरी तरह शिवमय कर दिया।

31 प्रस्तुतियों ने बांधा समां, सीएम ने किया सम्मान

मंचीय प्रस्तुतियों के दौरान सत्यम् शिवम् सुंदरम् और सांसों की माला पर सिमरू मैं शिव का नाम जैसी कालजयी रचनाओं की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। इस दौरान ख्यात गायक अभिजीत सावंत ने भी मंच साझा किया और देवा श्री गणेशा से अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेरा। कार्यक्रम के बीच में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर पहुंचकर कलाकारों का सम्मान किया। पूरी संध्या के दौरान कलाकारों ने कुल 31 दिलकश प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

टीम इंडिया की जीत पर लहराया तिरंगा

कार्यक्रम के दौरान ही भारतीय क्रिकेट टीम की जीत की खबर मिलते ही पूरा परिसर खुशियों से झूम उठा। संगीतकार प्रीतम और उनके सहयोगियों ने इसे महादेव का आशीर्वाद बताया। प्रीतम ने भावुक होते हुए कहा कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव के आशीर्वाद से भारत की जीत हुई है। इस खुशी के मौके पर कलाकारों ने मंच पर गर्व के साथ तिरंगा लहराया, जिसे देख दर्शकों ने भी भारत माता के जयकारे लगाए।

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