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मौत की डोर ने फिर बहाया खून… दो लोगों को घायल किया, एक का गला कटा दूसरे की नाक

20 टांके लगाने के बाद मुश्किल से बची जान, संक्रांति के बाद भी हो रही पतंगबाजी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मकर संक्रांति बीतने के बावजूद चायना डोर से पतंगबाजी जारी है। रविवार को मौत की डोर ने एक बार फिर खून बहाया। शाम को अलग-अलग घटनाओं में दो लोग घायल हो गए। इंदिरानगर चौराहे पर मैकेनिक चायना डोर की चपेट में आया जिससे उसका गला कट गया, उसे तत्काल चरक अस्पताल लाया गया जहां उसके गले में करीब २० टांके लगाने पड़े। इसी तरह नीलगंगा की ओर जा रहे बाइक सवार की नाक कट गई।

 

दरअसल, कमल कॉलोनी में रहने वाले 45 वर्षीय सुरेंद्र जायसवाल शाम करीब 4.30 बजे अपनी पत्नी की बहन के यहां कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इंदिरानगर चौराहे पर पहुंचते ही चायना डोर अचानक उनके गले में फंस गई जिससे गला कट गया और खून बहने लगा। घायल हालत में ही सुरेंद्र कार्यक्रम स्थल पहुंचा जहां उनके परिवार के लोग उन्हें चरक अस्पताल लेकर पहुंचे जहां गले में करीब २० टांके लगाने पड़े। फिलहाल उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है। सुरेंद्र जायसवाल पेशे से मैकेनिक हैं और उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं। इसी तरह का एक अन्य घटना में बाइक से नीलगंगा की ओर जा रहे मुकेश वाडिया भी चायना डोर की चपेट में आ गए जिससे उनकी नाक कट गई। तत्काल उनका उपचार करवाया गया।

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संक्रांति के बाद भी हादसे

अमूमन मकर संक्रांति के बाद पतंगबाजी का दौर थम जाता है लेकिन इस बार संक्रांति के चार दिन बाद भी चायना डोर से पतंगबाजी हो रही है। पुलिस ने पर्व से पहले लगातार चायना डोर से पतंग उड़ाने और बेचने वालों को पकडक़र एक्शन लिया लेकिन इन सबके बावजूद मकर संक्रांति पर चायना डोर का खूब पतंगबाजी हुई और यह सिलसिला अभी तक जारी है। इसी का नतीजा है कि दो लोग फिर मौत की इस डोर के शिकार हो गए। दूसरी ओर पुलिस भी उस तरह से सर्चिंग नहीं कर रही जिस तरह से संक्रांति से पहले की जा रही थी। हालांकि, बीते दिनों जीवाजीगंज पुलिस ने पांच नाबालिग सहित ६ युवकों को पकड़ा था और इनके पास से प्रतिबंधित चायना डोर के १२ गट्टे जब्त किए गए थे।

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