Advertisement

नेबुलाइजर और स्टीम में होता है बड़ा अंतर, बच्चों पर यूज करने से पहले समझ लें फर्क

सर्दियों में बच्चों में खांसी या सर्दी होने पर अक्सर पेरेंट्स स्टीम या नेबुलाइजर का सहारा लेते हैं। लेकिन कई माता-पिता यह नहीं जानते कि इन दोनों में क्या अंतर है और कौन सी कंडीशन में कौन सा तरीका अपनाना चाहिए। इसलिए आज हम पीडियाट्रिशियन डॉक्टर  से जानेंगे कि नेबुलाइजर और स्टीम में फर्क क्या है, और कब इसका यूज करना चाहिए। इसके अलावा, इनके क्या-क्या फायदे हैं। आइए इस बारे में जानते हैं सब कुछ विस्तार से-

Advertisement

सूजन ठीक होती है
इस सवाल पर मैं यही स्पष्ट करना चाहता हूं कि पेरेंट्स इस बात को सबसे पहले समझें कि नेबुलाइजर टेक्निक से दवा के बहुत छोटे-छोटे कण बन जाते हैं और जब वो मेडिसिन चेंबर में डाली जाती हैं और तो यह सीधे बच्चे के लंग्स तक पहुंचते हैं।

नाक बंद में राहत
स्टीम अक्सर पानी को उबालकर बनाई जाती है, इसलिए उसके कण काफी बड़े होते हैं। ये कण केवल बच्चे की सांस की नली के ऊपरी हिस्से तक ही पहुंचते हैं, यानी नाक और गले तक। यही वजह है कि स्टीम नाक बंद, रनिंग नोज और गले में इर्रिटेशन में राहत देती है। इसका इस्तेमाल अक्सर रनिंग नोज, नोज ब्लॉक और साइनसाइटिस में आराम देने के लिए किया जाता है।

Advertisement

इन कंडीशन में करते हैं नेबुलाइजर का यूज
डॉक्टर आगे बताते हैं कि नेबुलाइज का उपयोग अक्सर अस्थमा, ब्रोंकियोलाइटिस, ब्रोंकाइटिस और वीजिंग जैसी स्थितियों में किया जाता है, जो बच्चों में खांसी का कारण बनती हैं। ऐसे में इस तकनीक बच्चे के सांस की नली के निचले हिस्से में राहत मिलती है।

नेबुलाइजर और स्टीम दोनों ही सेफ है
पेरेंट्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि नेबुलाइजर खांसी के लिए और स्टीम सर्दी के लिए दी जाती है। दोनों ही सेफ और इफेक्टिव हैं, लेकिन सेल्फ मेडिकेशन न करें। हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही नेबुलाइजर इस्तेमाल करें।

Advertisement

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें