सर्वज्ञता पर श्रद्धा होनी चाहिए- पं. अभिनंदन

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:यदि मनुष्य में मान कषाय नही हो, तो मोक्ष अर्थात सच्चा सुख तत्काल मिल जाता है। सर्वज्ञता पर श्रद्धा होनी चाहिए। संसार सभी कर्म व्यवस्था पर आधारित है। उसमें बदलाव करने का अधिकार किसी का नहीं है,जो कुछ होता है सब निश्चित होता हैं।
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उक्त विचार प्रवचनकार बाल ब्रह्मचारी अभिनंदन जी ने श्री सीमंधर दिगंबर जैन मंदिर क्षीरसागर में आयोजित प्रवचन श्रृंखला में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीव मे पद,पैसा,प्रतिष्ठा,प्रतिस्पर्धा,प्रसिद्धि ओर प्रदर्शन इन सात ‘प’ की आदत नहीं हो तो सारा संसार उसको पूजने लगता है।

जीवन की सफलता के सात सूत्र है,जो उनका पालन करें वह भगवान बन सकता है। सर्वज्ञता पर श्रद्धा होनी चाहिए। मेरी अपनी श्रद्धा अपने में आएगी तभी सच्चा सुख प्राप्त होगा।
आपने कहा कि मैं ऐसा करता तो ऐसा हो जाता मैं वहां कुछ समय के लिए रुक जाता तो यह दुर्घटना नहीं होती यह सब विचार मिथ्या है इसलिए हमें आकुलता करने के बजाय सर्वज्ञ ने जो देखा है जाना है उसे पर श्रद्धा करनी चाहिए। इससे चित्त में समता आएगी। हमारे परिणाम में निर्मलता भी रहेगी। हम सदैव पद पैसा प्रतिष्ठा प्रतिस्पर्धा प्रसिद्धि और प्रदर्शन से दूर रहें।










