यूजीसी के बदले नियमों से उठा बवाल आज शाम टॉवर चौक पर होगा प्रदर्शन

सवर्ण समाज विद्यार्थियों के कॅरियर को लेकर आशंकित, रोल बैक करने की मांग

सामान्य वर्ग के संगठनों के सदस्यों से एकत्रीकरण की अपील
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उच्च शिक्षा क्षेत्र में अध्ययनरत सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को लेकर किए गए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के बदलाव से उबाल आ गया है। सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों ने बुधवार शाम 6 बजे टावरचौक पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इधर नियमों को सवर्ण समाज से जुड़े प्रबुद्धजनों ने समाज को बांटने वाला बताया है। भाजपा और उससे जुड़े संगठन के पदाधिकारी फिलहाल इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि कांग्रेस पदाधिकारी यूजीसी पर मुखर हैं और वह इसे जाति-धर्म के नाम पर बांटने वाला बता रहे हैं।
उच्च शिक्षा क्षेत्र में भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी ने 13 जनवरी को ही 2012 से चल रहे नियमों को हटाकर नए नियम लागू किए हैं। नए नियमों में एक समता समिति गठित करने और 15 दिन में एक्शन लेने का हवाला दिया गया है। इस मुद्दे पर सवर्ण समाज (जनरल) बिफर गया है। सोशल मीडिया पर वार शुरू करने के बाद अब उन्होंने जमीन लड़ाई की शुरुआत भी कर दी है। अक्षरविश्व ने इस मुद्दे को लेकर बात की।
विद्यार्थी जीवन में जाति-समाज नहीं होता, कॅरियर महत्वपूर्ण होता है
यूजीसी के नियमों में बदलाव यह बताते हैं कि अब तक समाज को बांटने वाली सरकार अब विद्यार्थियों को बांटने जा रही है। विद्यार्थी जीवन जाति, धर्म और समाज से ऊपर होता है, क्योंकि विद्यार्थी सिर्फ करियर के प्रति समर्पित रहते हैं। सरकार का यह कदम स्टूडेंट का जीवन खराब कर देगा। इसे वापस होना चाहिए।
मुकेश भाटी, शहर अध्यक्ष कांग्रेस
यूजीसी के नियम सवर्ण विद्यार्थियों को पढ़ाई से दूर कर देंगे। यह सवर्ण विद्यार्थियों को पढ़ाई से बाहर करने का गहरा षड्यंत्र है। इसे हम स्वीकार नहीं करेंगे। इन कानून का दुरुपयोग होगा। जैसे आज एट्रोसिटी एक्ट का हो रहा है। इस कानून का रोलबैक करना ही होगा।
सुरेंद्र चतुर्वेदी अध्यक्ष अभा ब्राह्मण महासभा
किसी के साथ दुव्र्यहार नहीं होना चाहिए लेकिन ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि किसी अन्य पक्ष को इतना कमजोर कर दिया जाए कि वह शिक्षा से दूर हो जाए। समानता का व्यवहार सबके लिए जरूरी है। सभी वर्ग को बराबर प्रोटेक्शन देना चाहिए। यूजीसी का कानून भारत की समरसता को खत्म कर देगा। एक ओर हम हिंदू समाज को एक करने के लिए सम्मेलन कर रहे हैं और दूसरी ओर उन्हें ही बांटने का षड्यंत्र कर रहे हंै।
अरविंद सिंह चंदेल, जिलाध्यक्ष सपाक्स, उज्जैन
यूजीसी का बदलाव सवर्ण विद्यार्थियों का करियर चौपट कर देगा। वह पढ़ाई नहीं कर सकेंगे। जनरल विद्यार्थियों का भविष्य खराब करने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सड़क से लेकर कोर्ट तक इसे चुनौती देंगे।
अतुल रैना, पूर्व अध्यक्ष उज्जैन अभिभाषक संघ
यूजीसी पर स्टैंड की प्रतीक्षा है। संगठन के मार्गदर्शन अनुसार इस पर अमल करेंगे।
सिद्धार्थ यादव, महानगर मंत्री, एबीवीपी
यूजीसी ने कोई नियम बनाए हैं तो सोच-समझकर ही बनाए होंगे। फिर भी इसके प्रावधानों का अध्ययन कर ही आगे कुछ कह सकूंगा।
राजेश धाकड़, जिलाध्यक्ष भाजपा
यूजीसी का नया बदलाव विद्यार्थियों के बीच फूट डालेगा। विद्यार्थी जीवन समरसता का होता है। सरकार इसे भी जाति वर्ग में बांटने में लगी है। यह कानून हर हाल में वापस होना चाहिए। अभी भी विद्यार्थियों को बांटा जा रहा है। बबलू खींची, छात्र नेता, एनएसयूआई, विक्रम परिक्षेत्र









