यह बातें, जो हर माता-पिता पेरेंट्स बनते ही सीख जाते हैं!

माता-पिता बनना ज़िंदगी का सबसे सुखद अनुभव होता है. इसे जिंदगी का सबसे बड़ा बदलाव भी कहा जाता है. यह सिर्फ एक नया रिश्ता नहीं, बल्कि सोचने, जीने और समझने का बिल्कुल नया अनुभव भी हमें सिखा देता है. बच्चे के आने के साथ ही प्यार, चिंता, थकान और खुशी, सब एक साथ महसूस होने लगती हैं. जो चीज़ें पहले आसान लगती थीं, अब चुनौती बन जाती हैं, और जो छोटी लगती थीं, वही सबसे बड़ी खुशी दे जाती हैं. आप जैसे ही पेरेंट बनते हैं, जिंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती चलती है- धैर्य, समझ, और बिना शर्त प्यार का असली मतलब.
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पेरेंटिंग हमें क्या सिखाती है-

1.प्लान अक्सर बदल जाते हैं-
घर से निकलते वक्त जो सोचा होता है, वह पूरा हो जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती. माता-पिता बनने के बाद यह समझ आता है कि प्लान हमेशा पूरा नहीं होता, यह बच्चे की तबीयत, मूड के आधार पर कभी भी बदल सकता है.
2.खाने की आदतों में बदलाव-
पेरेंटिंग में अक्सर लोगों के खाने की आदत बच्चों की वजह से बदल जाती है. छोटे बच्चों के लिए बिस्किट, फल या कुछ खाने का सामान ही धीरे-धीरे आप खुद भी अपने लिए मंगाने लगते हैं और उन्हें पसंद भी करने लगते हैं.
3.एक हाथ से हर काम करना आ जाता है-
बच्चे को गोद में लेकर दरवाज़ा खोलना, फोन चलाना और काम करना आदत बन जाती है.
4.चिंता हमेशा रहती है-
माता-पिता बनने के बाद चिंता हमेशा साथ रहती है. बच्चे की छोटी-छोटी बातों को लेकर भी दिल घबराने लगता है. लेकिन यही चिंता आपको ज्यादा समझदार और जिम्मेदार बनाती है.
5.अब समय पहले जैसा नहीं रहता-
माता-पिता बनने के बाद आपका समय अपना नहीं रह जाता. हर काम प्लानिंग और सही वक्त देखकर करना पड़ता है.
6.नींद की अहमियत समझ में आती है-
कम नींद में भी काम करना, मुस्कुराना और जिम्मेदारियाँ निभाना पेरेंटिंग सिखा देती है.
7.आप मजबूत बनते हैं-
इस सफर में आपको एहसास होता है कि आप जितना सोचते थे, उससे कहीं ज्यादा मजबूत हैं. थकान के बावजूद बच्चे को संभालना, उसकी देखभाल करना और हर दिन आगे बढ़ना, यह अंदर की ताकत दिखाता है.
8.छोटी-छोटी बातों पर हंसी आती है-
बच्चे की मासूम छोटी-छोटी हरकतों, अजीब आवाज़ों और बातों पर हंसी आना आम हो जाता है. यह तनाव के बीच एक खूबसूरत तोहफा है.
9.परफेक्ट होना जरूरी नहीं-
आप धीरे-धीरे यह भी सीखते हैं कि परफेक्ट होना ज़रूरी नहीं. साफ-सुथरा घर, हर काम सही समय पर ही हो, सब संभव नहीं होता. घर थोड़ा गंदा या काम अधूरा रहना आम बात हो जाती है.
10.धैर्य का नया मतलब सीखते हैं-
एक ही बात बार-बार समझाना और फिर भी शांत रहना अब पेरेंटिंग का हिस्सा बन जाता है.
11.दूसरे पेरेंट्स को समझने लगते हैं-
अब आप जल्दी किसी को जज नहीं करते, क्योंकि समझते हैं कि हर कोई अपनी पूरी कोशिश करता है.
12. मदद मांगना सीखते हैं-
जरूरत पड़ने पर परिवार या दोस्तों से मदद लेने में अब कोई शर्म नहीं होती.
13. रिश्तों की देखभाल जरूरी है-
पार्टनर के साथ छोटी-छोटी बातें करना और साथ बैठना रिश्ते को मजबूत बनाता है.
14. खुशी छोटी-छोटी चीज़ों में मिलती है-
हंसी, खेल या गले लगना असली खुशी देते हैं.
15. हर चीज़ आपका कंट्रोल में नहीं होती-
बच्चों की पसंद और मूड आपको सिखाते हैं कि सब कुछ अपने हिसाब से नहीं होगा.
16.थोड़ी गंदगी से समझौता करना पड़ता है-
खिलौने और बिखरा सामान अब आम बात लगती है.
17.जिम्मेदारी बढ़ती है-
हर निर्णय सोच-समझकर लेना सीखते हैं.
18.भावनाएं गहरी होती हैं-
प्यार, चिंता और खुशी पहले से ज्यादा महसूस होती हैं.
19.बच्चे को प्राथमिकता-
बच्चों की प्राथमिकता के आप आप अपनी जरूरतों को अक्सर पीछे छोड़ने लगते हैं.
20. प्यार का मतलब हरवक्त मौजूद रहना –
थकान और उलझन के बावजूद बच्चों के लिए हमेशा वहां होना ही सच्चा प्यार है.










