48 साल बाद… उज्जैन-आगर-झालावाड़ रेल मार्ग का सपना अब होगा पूरा
पहले होगा फाइनल लोकेशन सर्वे, फिर बनेगी डीपीआर
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रेल मंत्रालय ने फाइनल लोकेशन सर्वे डीपीआर बनाने के लिए 4.75 करोड़ रुपए की दी मंजूरी

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:उज्जैन-झालावाड़ रेल मार्ग का सपना 48 साल बाद अब पूरा हो सकेगा। भारतीय रेल मंत्रालय ने उज्जैन को झालावाड़ तक रेल मार्ग से जोडऩे की डीपीआर बनाने के लिए 4 करोड़ 75 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं और फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) को हरी झंडी दे दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके लिए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा की थी। 28 फरवरी को रेल मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर इससे अवगत कराया।
मध्यप्रदेश और राजस्थान को जोडऩे में यह रेल लाइन महत्वपूर्ण मानी जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री वैष्णव ने सीएम डॉ. यादव को इस आशय का पत्र भेज दिया है। केंद्र की मंजूरी के बाद रेलवे इसका सर्वे पूरा कर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाएगा। इस रिपोर्ट के बाद पटरी बिछाने का खर्च और कुल लंबाई साफ होगी।
इस रेल लाइन को मंजूरी देकर दोनों राज्यों की जनता की दम तोड़ चुकी उम्मीदों को पंख लग गए हैं। 48 साल पहले 70 के दशक में उज्जैन से आगर के बीच नेरोगेज रेल चलती थी। 1975 में आपातकाल के दौरान इस लाइन को ही उखाड़ दिया गया था।
योजना के मुश्किल स्टेशन
1975 में उज्जैन से आगर के बीच चलने वाली नेरोगेज लाइन को बंद किया गया था।
1977 में विधानसभा में इसे दोबारा चलाने का संकल्प पत्र पारित किया गया थे।
1998 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने रेल लाइऩ के दूसरे चरण के सर्वे का शुभारंभ किया था।
2000 में दूसरे चरण की सर्वे रिपोर्ट आई और यातायात सर्वे अनुकूल होने के बावजूद परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
रेल मंत्री का पत्र…

रेल मंत्री वैष्णव ने सीएम डॉ. यादव को लिखे पत्र में कहा है कि कृपया आपसे रेल लाइन के विषयों को लेकर हुई चर्चा का संदर्भ ग्रहण करें, जो उज्जैन, आगर, झालावाड़ नई रेल लाइन निर्माण के संबंध में है। आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि उज्जैन, आगर, झालावाड़ रेल लाइन निर्माण के लिए डीपीआर हेतु फाइनल।लोकेशन (एफएलएस) सर्वे को स्वीकृत कर दिया है।









