Wednesday, February 1, 2023
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उज्जैन : अब बारी महाकाल मंदिर के मुख्य परिसर के सौंदर्यीकरण की

उज्जैन। महाकाल लोक के प्रथम चरण के बाद दूसरे चरण के कार्य पर ध्यान दिया जाने लगा है। इसमें सौंदर्यीकरण के लिए अब महाकाल मंदिर के मुख्य परिसर और आसपास के क्षेत्र की बारी है।

दूसरे चरण में 505 करोड़ रुपए की लागत से शिखर दर्शन परियोजना अंतर्गत महाराजवाड़ा भवन और बड़ा गणेश मंदिर के सामने उद्यान का निर्माण और अन्य कार्य प्रस्तावित है। स्मार्ट सिटी कंपनी ने दूसरे चरण के काम मार्च- 2023 तक पूरे होने का दावा किया है। क्या होने वाला है आने वाले दिनों में फोटो से समझे..।

उद्यान का निर्माण (पूर्व के धर्मशाला,अन्न क्षेत्र,प्रवचन हॉल क स्थान पर) 2 कोटितीर्थ 3 श्री महाकाल मंदिर 4 मुख्य परिसर का निर्गम रैंप (पूर्व का नगाड़ा द्वार) 5 श्रद्धालु प्रवेश कॉरिडोर की छत पर उद्यान प्रस्तावित 6 महाकाल संग्रहालय

भक्तों के लिए खुले ‘महाकाल लोक’ के द्वार, दूसरे चरण की पूर्णता का इंतजार

फेस-2 के लिए 400 करोड़ का बजट, मार्च-23 डेडलाइन

उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर के नव विस्तार क्षेत्र महाकाल लोक का प्रवेश द्वार महाकाल के भक्तों के लिए खुल गया। सुबह से ही ‘महाकाल लोक’ को देखने लोगों की भीड़ जुटी। अब इस लोक के दूसरे चरण की पूर्णता का इंतजार हैं।

प्रशासन ने इसके मार्च 2023 तक की गाइडलाइन तय कर रखी हैं। ‘महाकाल लोक’ के प्रथम चरण में 351 करोड़ के काम योजना के पहले चरण में पूर्ण हुए हैं, जिनका लोकार्पण मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है। इसके बाद अब ‘महाकाल लोक’ के दूसरे चरण के कार्य में तेजी की उम्मीद और इंतजार सभी को है।

सरफेस पार्किंग और सोलर प्लांट….त्रिवेणी संग्रहालय के सामने 400 से अधिक वाहनों को पार्क करने के लिए सरफेस पार्किंग बनाई गई है। पार्किंग की छत पर सोलर पैनल लगाए हैं। कहा है कि इन सोलर पैनल की मदद से महाकाल लोक में जलाई जाने वाली 90 फीसद बिजली यहीं उत्पादित कर ली जाएगी।

अभी यह है नजारें

महाकाल पथ: महाकाल मंदिर में प्रवेश के लिए त्रिवेणी संग्रहालय के पीछे रूद्रसागर के किनारे 26 फीट ऊंचा लाल पत्थर से नंदी द्वार बनाया है। 920 मीटर लंबा महाकाल पथ बनाया है, जिसके एक ओर 25 फीट ऊंची और 500 मीटर लंबी लाल पत्थर की दीवार बनाई है। दीवार पर शिव महापुराण में उल्लेखित घटनाओं के शैल चित्र उकेरे गए हैं। घटनाओं का संस्कृत में संदर्भ लिखा है। इसके ठीक सामने 108 शिव स्तंभ हैं। इन स्तंभों पर भगवान शिव एवं उनके गणों की विभिन्न मुद्राएं बनाई हैं।

मूर्तियों की स्थापना: कमल सरोवर बनाया हैं, जिसके बीच आदि योगी शिव की विशाल मूर्ति स्थापित की है। इसी ओर सप्त ऋषियों की विग्रह स्वरूप में मूर्ति, नवग्रहों की विग्रह स्वरूप मूर्तियां, 25 फीट ऊंचा शिव स्तंभ, भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर के संहार को दर्शाती 70 फीट लंबी मूर्ति, भगवान गणेश, कार्तिकेय और माता पार्वती की मूर्ति, वीरभद्र द्वारा दक्ष के शिरच्छेदन की मूर्ति स्थापित की है। इसी तरह प्रसाद एवं टिकट काउंटर बनाया गया है।

यहीं त्रिवेणी मंडपम (कमर्शियल प्लाजा) है। रूद्रसागर किनारे 111 फीट लंबी दीवार पर शिव विवाह के शैल चित्र बनाए गए हैं। इसी तरफ भगवान शिव भगवान शिव और अन्य देवी देवताओं की 75 विशाल मूर्तियां स्थापित हैं। नंदी द्वार से करीब 400 मीटर दूर मध्यांचल भवन (मीड वे जोन) जहां दुकानें बनाई हैं।

मध्यांचल भवन (फैसिलिटी सेंटर) बनाया है, जिसके भीतर महाकाल मंदिर जाने को रास्ता है और प्रथम फ्लोर पर रेस्टोरेंट। इसके आगे जाए तो संध्या वाटिका (नाइट गार्डन) बनाया है, जहां वासुकी नाग की कुंडली में बैठे योगी शिव की मूर्ति है।

इसके आगे भगवान श्री गणेश, शिव, श्रीकृष्ण की मूर्ति है। ‘महाकाल लोक’ भगवान शिव की लीलाओं पर आधारित 190 मूर्तियां स्थापित हैं। इसमें 18 फीट की 8, 15 फीट की 23, 11 फीट की 17, 10 फीट की 8, 9 फीट की 19 मूर्तियां शामिल हैं। ‘महाकाल लोक’ में 26 फीट ऊंचा नंदी द्वार बनाया गया है।

खूबसूरत रूद्रसागर: इसका कायाकल्प किया गया है। रूद्रसागर से पांच लाख क्यूबिक मीटर गाद निकालकर उसमें नर्मदा, शिप्रा, गंभीर नदियों का स्वच्छ जल भरा गया है। सागर के चारों ओर मिट्टी का कटाव रोकने को काले पत्थर की दीवार यानी गेबियन वाल बनाई गई है।

प्राचीन द्वार- वर्तमान महाकाल थाने के समीप प्राचीन महाकाल द्वार का जीर्णोद्धार किया गया है।

सुरक्षा एवं सुंदरता के इंतजाम: महाकाल लोक परिसर में 400 कैमरे लगाए, तकरीबन इतनी ही आराम कुर्सी, अग्निशमन यंत्र और भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले फल-फूल, लता-पत्रों के पौधे रोपे गए हैं।

योजना के दूसरे चरण में यह काम

महाकाल मंदिर के समीप हेरिटज धर्मशाला और त्रिवेणी संग्रहालय के सामने महाकाल धर्मशाला का निर्माण

चारधाम मंदिर पहुंच मार्ग से महाकाल मंदिर के पिछले हिस्से तक रूद्रसागर पर 210 मीटर लंबे पैदल पुल का निर्माण

महाकाल मैदान वाली जगह पर सरफेस पार्किंग, सांस्कृतिक हाट बाजार का निर्माण

रामघाट सुंदरीकरण एवं सिंहस्थ थीम पर यहां सिंहस्थ थीम आधारित डायनामिक लाइटिंग शो।

बड़ा गणेश मंदिर, सरस्वती विद्या मंदिर, महाकालपुरम् तरफ के महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों का चौड़ीकरण।

बैगमबाग मार्ग और चारधाम मंदिर पहुंच मार्ग विकास एवं सुंदरीकरण।

शिखर दर्शन परियोजना अंतर्गत महाराजवाड़ा भवन और बड़ा गणेश मंदिर के सामने उद्यान का निर्माण।

महाकाल मंदिर के पूर्वी हिस्से में फैसिलिटी सेंटर का निर्माण।

रूद्रसागर में लेजर शो और फ्रंट लेक व्यू का निर्माण।

महाकाल विस्तारित योजना पर एक नजर

856 करोड़ की है महाकाल महाराज मंदिर परिसर विस्तार योजना।

महाकाल महाराज मंदिर परिसर विस्तार योजना के प्रथम चरण के काम की शुरुआत 7 मार्च 2019 को 97 करोड़ रुपये की महाकाल-रूद्रसागर एकीकृत विकास दृष्टिकोण परियोजना नाम से हुई थीं, जिसके पूर्ण होने पर इस क्षेत्र को नाम ‘महाकाल लोक’ दिया गया है।

351 करोड़ के काम योजना के पहले चरण में पूर्ण हुए हैं, जिनका लोकार्पण किया है।

505 करोड़ रुपये के काम दूसरे चरण में मार्च- 2023 तक पूरे होने का दावा स्मार्ट सिटी कंपनी ने किया है।

महाकाल मंदिर परिसर का क्षेत्र 2.82 हेक्टेयर से बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। इसमें 17 हेक्टेयर क्षेत्र रूद्रसागर तालाब का सम्मिलित है।

महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद शहर में पर्यटकों की संख्या बढऩे अनुमान है।

‘महाकाल लोक’ में जितनी बिजली खर्च होगी, उसकी 90 फीसद बिजली यहीं सोलर प्लांट में बनेगी।

इसे भी याद रखा जाएगा

मेहमानों के बैठने से कुर्सियां हो गई साफ

उज्जैन। ‘महाकाल लोक’ का लोकार्पण, लोकोत्सव वैसे तो अपनी अनुपम विशेषताओं की वजह से यादगार बनकर लोगों के मन में मधुर स्मृतियों के साथ अंकित हो गया, लेकिन इस शानदार लोकोत्सव के कुछ कुप्रबंध ने उत्साह उमंग में खलल डालने का काम कर दिया। लोकोत्सव में प्रख्यात गायक सोनू निगम की प्रस्तुति थी।

चूंकि सोनू निगम महाकाल के परमभक्त है स्वाभाविक था कि वे अपने पूर्ण क्षमता के ग्रुप और संसाधनों से लेस होकर शिवोह्म की प्रस्तुति के लिए आए थे। कार्यक्रम भी उच्चतम स्तर का था, लेकिन आयोजकों के प्रबंधन में कई खामी रही। पहले प्रचारित किया गया कि कार्यक्रम सभी के लिए खुला है। स्थान भी पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर रहेगा। आयोजन स्थल पर स्थिति बदली हुई थी।

कार्यक्रम पहुंचने वालों से पास (प्रवेश-पत्र) मांगा गया, जिनके पास प्रवेश-पत्र नहीं था, उन्हें कालिदास अकादमी में जाने से रोक दिया। कुछ हंगामा हुआ तो व्यवस्था बदल दी। सभी के लिए प्रवेश खोल दिया। खास बात तो यह कि आयोजक संस्था ने कार्यक्रम के पूरे प्रवेश-पत्र दो चुनिंदा व्यक्तियों को थमा दिए थे। दोनों ने इसके वितरण में जमकर मनमानी की। इतना ही नहीं मेहमानों (दर्शक/श्रोताओं) के लिए रखी गई कुर्सियां साफ भी नहीं की गई। रोशनी कम होने से अधिकांश लोगों के कपड़े कुर्सियों की गंदगी से खराब तो हो गए,पर कुर्सियां साफ हो गई।

जंगल में मोर नाचा किसने देखा

‘जंगल में मोर नाचा किसने देखा’-इस कहावत को महानाट्य और लेजर शो ने साबित कर दिया। तीन अलग-अलग दिन कपिल यार्दे की संस्था राष्ट्रवादी सामान्य जनचेतना विकास समिति के महानाट्य की प्रस्तुति हो गई।

किसी का पता भी नहीं चला कि उसमें क्या था..? कितने दर्शक उसके साक्षी बने…? उन्हें क्या देखने को मिला..? प्रस्तुति के अगले दिन संस्था और आयोजकों को यह बताना भी आवश्यक नहीं समझा। वैसे महानाट्य के नाम पर केवल रस्म अदायगी की गई। दर्शक/श्रोताओं की संख्या एक भी प्रस्तुति में 200 से 250तक नहीं पहुंची थी।

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को न्यास में बदल दिया..!

‘महाकाल लोक’ लोकार्पण आयोजन की मुख्य इकाई ने अनोखा और निराला काम कर दिया है। मप्र शासन संस्कृति विभाग ने सूफी गायक कैलाश खेर रचित-प्रस्तुत महाकाल के स्तुतिगान का जो आवरण पृष्ठ तैयार किया है उसमें प्रकाशित किया है-‘पद्मश्री कैलाश खेर द्वारा रचित अप्रतिम प्रस्तुति महाकालएंथम का चित्र विमोचन मप्र शासन संस्कृति विभाग एवं महाकाल मंदिर न्यास उज्जैन की ओर से जारी।’

सबसे खास बात तो यह कि महाकाल मंदिर प्रबंध समिति हैं। इसका मप्र सरकार की केबिनेट द्वारा एक्ट (अधिनियम) पारित हैं। ऐसे समिति को न्यास के तौर पर प्रदर्शित करना उचित नहीं है, लेकिन संस्कृति विभाग ने ऐसा कर दिया है। बता दें कि सूफी गायक कैलाश खेर ने महाकाल के स्तुतिगान (एंथम) जयश्री महाकाल खुद ही रचा और कम्पोज किया है। इसमें महाकाल और उज्जयिनी का विस्तार से वर्णन है। महाकाल को समर्पित यह पहला आधिकारिक गान है।

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