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उज्जैन में होंगे 11 प्लेटफार्म और 16 लाइन

अगले 5 साल में प्रमुख शहरों में ट्रेन संचालन क्षमता दोगुनी करने की तैयारी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। यात्रियों की संख्या में हो रही तीव्र वृद्धि को देखते हुए रेलवे अगले 5 सालों में इंदौर, आंबेडकर नगर, लक्ष्मीबाई नगर और उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन संचालन क्षमता को मौजूदा स्तर से दोगुना करने की तैयारी कर रहा है। इस कड़ी में उज्जैन रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म की संख्या 11 और रेललाइन 16तक बढ़ाने का प्लान तैयार किया गया है।

 

रतलाम मंडल में उज्जैन रेलवे स्टेशन को खास माना गया है। इसकी वजह है धार्मिक पर्यटन। धार्मिक नगरी उज्जैन में यूं तो साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पर सिंहस्थ में यह संख्या काफी बढ़ जाती है। उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ होना है। ऐसे में यहां अभी से रेलवे ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत 9 नई स्टेबलिंग/होल्डिंग लाइन बनाई गई है। इससे इससे करीब11 प्लेटफॉर्म की क्षमता विकसित हो गई है। यहां पर ट्रेन को आगे और पीछे से खड़ा किया जा सकता है। इससे रिटर्न ट्रेनों को खड़ा करने और टर्मिनेट करने की क्षमता विकसित हो गई है। यार्ड रिमॉडलिंग, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम पूरा कर लिया गया है। अतिरिक्त यात्रियों का समायोजन करने के लिए होल्डिंग जोन भी बनाया जाएगा।

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पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया कि इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में 7 नई पिट लाइन और 16 नई स्टेबलिंग लाइनों की सुविधा प्राप्त होगी। इससे रोजाना 21 प्राइमरी मेंटेनेंस और 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों सहित 32 अतिरिक्त ट्रेनों की संचालन किया जा सकेगा। इससे मालवा क्षेत्र से लंबी दूरी की गाडिय़ों की कनेक्टिविटी होगी।

इंदौर स्टेशन: यहां से रोजाना 57 जोड़ी गाडिय़ां संचालित होती हैं। इसमें 41 जोड़ी ओरिजिनेट/टर्मिनेट होती है। यहां 6 प्लेटफॉर्म और 5 पिट लाइनें उपलब्ध हैं।

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 लक्ष्मी बाई नगर: इस रेलवे स्टेशन पर अभी 4 स्टेबलिंग लाइन, 3 प्लेटफार्म तथा 1 शंटिंग नेक उपलब्ध है यहां दो अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण का कार्य प्रगति पर है। २५९ करोड़ की लागत से कोचिंग मेंटेनेंस डिपो स्थापित किया जा रहा है। 5 नई पिट लाइन, 7 स्टेबलिंग लाइन और सिक कोच लाइन बनाई जाएंगी। इससे रोजाना 15 प्राइमरी मेंटेनेंस ट्रेनों की देखरेख संभव होगी। यह डिपो इंदौर के दबाव को कम करेगा।

डॉ. अंबेडकर नगर (महू) : वर्तमान में यहां 4 प्लेटफार्म एवं 3 पिट लाइन हैं। यहां प्लेटफार्म की लंबाई, ओएचई एवं प्लेटफार्म कनेक्टिविटी के कार्य मार्च 2026 तक पूरे होंगे। इसके बाद यह स्टेशन अधिक गाडिय़ों के संचालन हेतु सक्षम हो जाएगा। वर्तमान में यहां से 15 जोड़ी नियमित एवं 2 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन हो रहा है। यहां कोचिंग डिपो विकसित किया जा रहा है । 2 नई पिट लाइनों का कार्य होगा। इससे 6 ट्रेनों की मेंटेनेंस क्षमता बढ़ेगी।

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हम यात्रियों की बढ़ती मांग और भीड़भाड़ को कम करने के लिए अलग-अलग शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार कर रहे हैं। अनुभागीय एवं परिचालन क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं।

 

सिंहस्थ से पहले ८६४ करोड़ से बदल जाएगी घाटों की तस्वीर

उज्जैन। सिंहस्थ 2028की तैयारियों के क्रम में पुण्यसलिला शिप्रा नदी के तट पर 29 किमी लंबे नए और स्थायी घाटों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। 864करोड़ रुपए की लागत से वाली इस परियोजना का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित स्नान की सुविधा उपलब्ध करवाना है।

विस्तार
परियोजना में मौजूदा घाटों का विस्तारीकरण भी शामिल है जिससे कुल घाटों की लंबाई लगभग २९ किमी तक फैले होंगे।

सुविधाएं
घाटों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए सुगम मार्ग और यहां तक कि साइकिल ट्रैक शामिल होंगे।

उद्देश्य
सिंहस्थ 2028 के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए शिप्रा पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना।

 

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