इंजीनियरिंग कॉलेज में वेतन मद से आउटसोर्स कंपनी के भुगतान को लेकर बवाल

गड़बड़ी की शिकायत पहुंची तकनीकी शिक्षा विभाग, प्राचार्य बोले- मैंने फारवर्ड किया पत्र
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अक्षरविश्व न्यूज.उज्जैन। उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज में ऑटोनामस बॉडी के वेतन मद से आउटसोर्स कंपनी को भुगतान करने के मामले से बवाल मचा हुआ है। इस गड़बड़ी की शिकायत तकनीकी शिक्षा विभाग पहुंची है। इधर कॉलेज प्राचार्य का कहना है कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। इस मामले में तकनीकी शिक्षा विभाग भेजा गया पत्र उन्होंने ही फारवर्ड किया।
उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज में ऑटोनामस स्टाफ को मद संख्या 8885 (पोषण अनुदान) वेतन जारी किया जाता है। जुलाई माह में इस मद से कॉलेज में कार्यरत आउटसोर्स कंपनी को 23.84 लाख रुपए का भुगतान वेतन मद से कर दिया गया, जबकि नियमानुसार वेतन मद से सिर्फ प्रोफेसर-कर्मचारियों को ही भुगतान किया जा सकता है।
यह बताया शिकायत में
वेतन मद की राशि का दुरुपयोग के मामले में तकनीकी शिक्षा मंत्री,सचिव,आयुक्त और उज्जैन संभागायुक्त-कलेक्टर से की गई है। तकनीकी शिक्षा भोपाल के सूत्रों के अनुसार विभाग पहुंची शिकायत में बताया गया है कि उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज ऑटोनामस बॉडी है। यहां पर जुलाई माह में प्राचार्य द्वारा मद संख्या 8885 (पोषण अनुदान) से 23 लाख 84 हजार 250 रुपए का भुगतान इंजीनियरिंग कॉलेज में आउटसोर्स पर कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली कंपनी यश गोविंद मार्केटिंग एजेंसी को भुगतान कर दिया।
नियम अनुसार यश गोविंद मार्केटिंग एजेंसी सोसायटी (ऑटोनामस) में कार्यरत अमले में शामिल नहीं है। आउटसोर्स और अन्य व्यय के लिए अलग से प्रावधान है। इसमें कॉलेज को सालाना ९६ लाख की मद है। इसके बाद भी मद संख्या 8885 (पोषण अनुदान) से आउटसोर्स एजेंसी को भुगतान किया गया है। आउटसोर्स एजेंसी का भुगतान मिलेनियर्स खर्च में से किया जाने का प्रावधान है। जुलाई की तरह ही अगस्त में इस मद से एजेंसी को भुगतान करने का प्रस्ताव बनाया गया है।
भुगतान होने की स्थिति में मद संख्या 8885 से वेतन पाने वाले ४० ऑटोनामस स्टाफ और ४० गेस्ट फैकल्टी के समक्ष वेतन का संकट खड़ा हो सकता है। दरअसल ऑटोनामस कॉलेज होने से ऑटोनामस स्टाफ और गेस्ट फैकल्टी के वेतन का निर्धारण सालभर पहले हो जाता है। इसी अनुसार मद में राशि का आवंटन किया जाता है। इसमें मद से अन्य भुगतान होने पर वेतन मिलने में परेशानी खड़ी हो सकती है।
पत्र लिखने पर नोटिस जारी
बताया जाता है कि वेतन की राशि से अन्य भुगतान होने का मामला सामने आने और इस संबंध में तकनीकी शिक्षा विभाग को पत्र लिखने पर प्राचार्य की ओर से नोटिस जारी किए गए है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अनुदान में अलग अलग कैटेगरी
इस मामले में उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य जेके श्रीवास्तव का कहना है कि किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। मद संख्या 8885 (पोषण अनुदान) में स्वीकृति और भुगतान को लेकर अलग-अलग केटेगरी है। इसमें आउटसोर्स का भुगतान भी शामिल है। ऑटोनामस संस्था होने के कारण किसी भी सेवानिवृत्ति के बाद नई भर्ती करने की बजाए पद की पूर्ति आउटसोर्स से की जारी है। वेतन का भुगतान भी स्वीकृत बजट से किया गया है। एजेंसी के कर्मचारी भी तो कॉलेज में सेवा प्रदान कर रहे है। जहां तक नोटिस का सवाल है सभी को हस्ताक्षर सत्यापन के लिए बुलाया था। चालीस चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी कर्मचारियों में से ३९ ने हस्ताक्षर से इनकार किया।
पहले भुगतान फिर मांग पत्र
सूत्रों का कहना है कि मद संख्या 8885 (पोषण अनुदान) से आउटसोर्स एजेंसी को भुगतान करने के मामले में अनियमितता हुई है। इसमें एजेंसी से मांग-पत्र मिलने के पहले ही भुगतान कर दिया गया है। एजेंसी को राशि का भुगतान ०९ जुलाई को किया गया,जबकि मांग-पत्र १२ जुलाई को प्रस्तुत हुआ है।
बता दें कि तकनीकी शिक्षा आयुक्त कार्यालय द्वारा वित्त वर्ष २०२४-२०२५ के बजट के अंतर्गत स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज उज्जैन को ३० लाख रु के अनुदान की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें स्पष्ट किया अनुदान का उपयोग संस्था में सोसायटी के अंतर्गत कार्यरत अमले को दिए जाने वाले वेतन-भत्तों के मात्र भुगतान के लिए किया जाएगा। इसके बाद आउटसोर्स को भुगतान किया जा रहा है।









