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सनातन संस्कृति का मूल आधार है वेद

आर्य समाज के पदाधिकारियों ने नव संवत्सर के साथ उत्साह से मनाया स्थापना दिवस

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन आज हमने अपने मूल शास्त्रों वेदों उपनिषदों आर्ष साहित्य को भुला दिया है। आर्य किसी व्यक्ति या समूह का नाम नहीं है बल्कि आर्य एक श्रेष्ठ विचारधारा है। मनुष्य को मनुष्य के रूप में स्थापित करने वाले तत्व को धर्म कहा गया है। जब धर्म तत्व विद्यमान होगा तभी मनुष्य की संज्ञा होगी। महर्षि दयानंद ने आर्य समाज के माध्यम से हमें सर्वश्रेष्ठ मार्ग बताया है जो ऋषियों और मुनियों द्वारा प्रणीत मार्ग है जिस पर चलकर समाज और राष्ट्र का कल्याण हो सकता है।

 

उक्त विचार महर्षि पाणिनि वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. तुलसीदास परोहा ने आर्य समाज उज्जैन में नवसंवत्सर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य धर्मदेव शास्त्री ने कहा जब व्यक्ति के पास ज्ञान बल और धन सर्वोपरि होते हैं तब उसे प्रमाद और अहंकार आ जाता है।

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इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य डॉ. आनंद मोहन सक्सेना एवं आर्य माताजी मंजुला अग्रवाल का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। मुख्य कार्यक्रम के प्रारंभ में ईश प्रार्थना मदनलाल कुमावत ने एवं भजनों की प्रस्तुति सिरोलिया बहन ने दी। अतिथि परिचय डॉ. ललित नागर ने दिया। संचालन आचार्य जीवन प्रकाश आर्य ने किया। आभार उप मंत्री जितेश बत्रा ने माना।

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