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‘संजा’ त्योहार के संरक्षण हेतु कार्यशाला

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मालवा क्षेत्र की प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर ’संजा’, जो कि एक पारंपरिक लोक त्योहार है, अब धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर है। इस लोक पर्व को पुनर्जीवित करने और नई पीढ़ी को इससे जोडऩे के उद्देश्य से ओमकार सांस्कृतिक संस्थान द्वारा मोहनपुरा में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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यह कार्यशाला मालवा की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और संजा पर्व के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल रही। संजा पर्व विशेष रूप से महिलाओं और युवतियों द्वारा मनाया जाता है, जिसमें वे दीवारों पर सुंदर रंगोलियां (संजा) बनाती हैं और लोकगीत गाती हैं।

इस पर्व के माध्यम से समाज में सामूहिकता, सौंदर्य और परंपराओं का निर्वहन होता रहा है। कार्यशाला का शुभारंभ ओमकार सांस्कृतिक संस्थान की संस्थापक अमृता उषारिया द्वारा किया गया, जिन्होंने संजा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व पर प्रकाश डाला।

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इस अवसर पर संस्थान ने यह घोषणा की कि वे भविष्य में भी ऐसी और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, जिससे न केवल संजा पर्व बल्कि अन्य लोक परंपराओं को भी संरक्षण मिलेगा। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक संजा गीतों के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष प्रीति गुप्ता, सचिव भूषण जैन, मीना खत्री, राजेश गुप्ता, अंजलि सोलंकी, लक्ष्य गुप्ता, ईशा परमार, यतिका दीवान आदि उपस्थित थे।

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