नए साल में परवान चढ़ेगा उज्जैन में चिडिय़ाघर का काम

28 जनवरी को डीपीआर सौंपने की तारीख तय
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वनतारा जनवरी में बनाकर सौपेंगा डीपीआर, सिंगापुर की तर्ज पर होगा जू का विकास

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट उज्जैन के चिडिय़ाघर का काम अगले साल की शुरुआत में होने की उम्मीद बंधी है। उद्योगपति अनंत अंबानी की संस्था वनतारा इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कर रही है, डीपीआर सौंपे जाने की तारीख 28 जनवरी तय की गई है। वन अमला इस कोशिश में है कि डीपीआर आने के साथ ही केंद्रीय पर्यावरण कमेटी और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही जगहों से इस प्रोजेक्ट के लिए क्लीयरेंस करवा लिया जाए ताकि काम तेजी से शुरू हो सके।
उज्जैन में मक्सीरोड स्थित नौलखी बीड़ की 201 हेक्टेयर जमीन पर जू (चिडिय़ाघर) बनाने का प्रोजेक्ट तीन साल पुराना है। इस बीच दो डीएफओ बदल गए। किरण बिसेन के कार्यकाल में इस प्रक्रिया की शुरूआत हुई, फिर पीडी ग्रेब्रियल आए और अब अनुराग तिवारी तीसरे डीएफओ हैं जो इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रोजेक्ट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रुची ली और इसे अनंत अंबानी के प्रोजेक्ट वनतारा के साथ जोड़ा तब इस काम में तेजी आई। इसी साल 21 अक्टूबर को वनतारा के विशेषज्ञों की टीम उज्जैन आकर गई है। इसी टीम को उज्जैन जू की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट(डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वनतारा की टीम 28 जनवरी तक डीपीआर तैयार कर शासन को सौंपेगी।
कोर्ट में पीआईएल लगाई, केंद्र से मिली मंजूरी
जू के प्रोजेक्ट में देरी न हो और 2028 सिंहस्थ से पहले इसके पहले चरण का काम पूरा कर लिया जाए, इसलिए तीन स्तर पर प्रयास हो रहे है। डीपीआर तैयार करवाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट से प्रोजेक्ट की अनुमति प्राप्त करने के लिए वन विभाग ने पीआईएल दायर कर दी है। वन क्षेत्र में किसी भी पक्के निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी होती है। केंद्रीय पर्यावरण सतर्कता समिति की शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है, डीपीआर आने के बाद उसे भी केंद्रीय समिति को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
पहले विक्रम वाटिका में होता था छोटा जू
नौलखी बीड में जू तैयार होने पर शहरवासियों को उज्जैन में ही जंगली जानवर देखने को मिलेंगे। करीब 30 साल बाद ऐसी स्थिति बनेगी। 1995 तक कोठी रोड स्थित विक्रम वाटिका (अब मयूर वन) में छोटे जंगली जानवर होते थे। इनमें हिरण, सियार, लोमड़ी, साही प्रमुख थे। विक्रम वाटिका को निजी क्षेत्र में देने पर यह जानवर स्थानांतरित कर दिए गए थे। तब विक्रम वाटिका को छोटे जू के तौर पर जाना जाता था।
एक नजर प्रोजेक्ट पर
मक्सीरोड़ स्थित नौलखी बीड़ की 201 हेक्टेयर जमीन पर चिडिय़ाघर का निर्माण होना है, इसे जामनगर में बने रिलायंस के वनतारा की तर्ज पर बनाया जाना है।
वनतारा की टीम ही इसकी डीपीआर तैयार कर रही है, प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत 300 करोड़ रुपए आंकी गई है।
यहां जू सफारी के साथ ही जंगली जानवरों के लिए रेस्क्यू सेंटर और अस्पताल भी बनाया जाएगा।
प्रोजेक्ट के पहले फेज में सभी तरह के जंगली जानवर लाए जाएंगे, जबकि दूसरे और तीसरे फेज में नाइट सफारी, मिनी रेल और रेस्क्यू सेंटर जैसे काम पूरे किए जाएंगे।
पहले फेज को 2028 में और शेष दो फेज को 2030 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित है।
सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल लगा दी गई है, केंद्रीय समिति की शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है। जनवरी में डीपीआर आते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कोशिश है कि 2026 के शुरुआती दिनों में ही इस पर काम शुरू हो जाए।
– अनुराग तिवारी, डीएफओ









