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आज है गोवर्धन पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा

आज 26 अक्टूबर दिन बुधवार को देश भर में गोवर्धन पूजा मनाया जा रहा है. इस दिन प्रीति योग में गोवर्धन पूजा है. यह योग मांगलिक कार्यों के लिए शुभ है. इस दिन लोग भगवान श्रीकृष्ण, गौ माता और गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं. इनके अलावा इंद्र देव, अग्नि देव, वरुण देव आदि की भी पूजा करते हैं. गोवर्धन पूजा को देश के कुछ हिस्सों में अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है।

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इस पावन दिन भगवान श्री कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा- अर्चना की जाती है। क्योंकि इस दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं पूजा के दिन भगवान श्री कृष्ण को 56 या 108 तरह के पकवानों का भोग भी लगाया जाता है।पूजा के समय भगवान श्रीकृष्ण अर्पित कर भोग लगाते हैं. भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और धन-धान्य में वृद्धि होती है.

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त (Goverdhan Puja Muhurat)

उदया तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा का पर्व 26 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा. गोवर्धन पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 18 मिनट पर होगी और इसका समापन 26 अक्टूबर दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगा. इसका शुभ मुहूर्त 26 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से लेकर 08 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.

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गोवर्धन पूजा की विधि (Goverdhan Puja Vidhi)

गोवर्धन पूजा के दिन घर के आंगन में गोबर से भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है. इस आकृति में आंख, नाक व नाभि भी बनाई जाती है. इसके चारों ओर ग्वाले, गाय व भैंस की आकृति बनाने का भी चलने है. यह प्रतिमा गोवर्धन पर्वत व ग्वालों की प्रतीक होती है. शुभ मुहूर्त के समय इस प्रतिमा का पूजन किया जाता है.

पूजन के लिए रोली, चावल, खील, बताशे, जल, कच्चा दूध, पान, केसर, फूल और दीपक थाली में अवश्य रखें जाते हैं. इसके बाद घर के पुरुष गोवर्धन महाराज को रोली, चंदन व हल्दी का तिलक करते हैं और उन्हें केसर, पान, फूल अर्पित करते हैं. फिर घी का दीपक जलाते हैं.इसके बाद हाथ में खील लेकर गोवर्धन महाराज की प्रतिमा की 7 बार परिक्रमा करते हैं और परिक्रमा करते समय थोड़ी-थोड़ी खील ​अर्पित करते रहते हैं.

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परिक्रमा पूरी होने के बाद जल अर्पित किया जाता है. बता दें कि गोवर्धन भगवान की प्रतिमा में नाभि बनाई जाती है और उस नाभि में कच्चा दूध डाला है. इस दूध को प्रसाद के तौर पर हर कोई ग्रहण करता है. पुरुषों की परिक्रमा पूरी होने के बाद महिलाएं भी उसी विधान से परिक्रमा करती हैं और जल अर्पित करती हैं. इसके बाद मंगलगान या भजन गाए जाते हैं. इस दिन पूजा में मीठे पुए बनाए जाते हैं और उनका भोग लगाया जाता है.

गोवर्धन पूजा कथा (Goverdhan Vrat Katha)

द्वापर युग में श्री कृष्ण ने देखा कि एक दिन सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे थे और किसी पूजा की तैयारी कर रहे थे। इसे देखते हुए कृष्ण जी ने माता यशोदा से पूछा कि ये किस पूजा की तैयारी हो रही है? कृष्ण की बातें सुनकर यशोदा माता ने बताया कि इंद्रदेव की सभी ग्राम वासी पूजा करते हैं जिससे गांव में ठीक से वर्षा होती रहे और अन्न धन बना रहे। उस समय लोग इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए अन्नकूट चढ़ाते थे। यशोदा मीता ने कृष्ण जी को ये भी बताया कि इंद्र देव की कृपा से अन्न की पैदावार होती है

जिससे गायों को चारा मिलता है। इस बात पर श्री कृष्ण ने कहा कि फिर इंद्र देव की जगह हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि गायों को चारा वहीं से मिलता है। इस बात पर बृज के लोग इंद्र देव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। ये देखकर इंद्र देव क्रोधित हो घए और उन्होंने मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। इंद्रदेव ने इतनी तेज वर्षा की कि उससे बृज वासियों की फसल को नुकसान हो गया।

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