इंदौर से मुख्य संचालक सहित 4 आरोपियों को दबोचा, लाखों का माल जब्त

जीवाजीगंज पुलिस ने किया फर्जी शेयर ट्रेडिंग कॉल सेंटर का भंडाफोड़
उज्जैन। जीवाजीगंज पुलिस ने शेयर ट्रेडिंग के नाम ठगी का खुलासा करते हुए फर्जी शेयर ट्रेडिंग कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। मुख्य संचालक सहित 4 आरोपियों को इंदौर से गिरफ्तार करते हुए लाखों रुपए का माल जब्त किया है।
जीवाजीगंज पुलिस ने बताया कि आवेदक सूरज राठौर निवासी राधामोहन की गली, अंकपात मार्ग ने 25 मार्च को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज करवाई थी कि अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उसे शेयर मार्केट में ट्रेडिंग कर अधिक लाभ दिलाने का झांसा देकर कुल 70 हजार रुपए की धोखाधड़ी।
शिकायत साइबर पोर्टल पर दर्ज होने के बाद जीवाजीगंज थाने को मिली जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। इसमें मोबाइल नंबर, बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन एवं डिजिटल फुट प्रिंट का विश्लेषण किया। इस दौरान मोबाइल नंबरों एवं बैंक खातों से संदेही सौरभ पिता विजय यादव निवासी न्यू गौरीनगर, इंदौर की पहचान की गई। उक्त संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई जिसमें उसने फर्जी शेयर ट्रेडिंग नेटवर्क की जानकारी दी।
सौरभ यादव से सूचना के आधार पर इंदौर के विजयनगर थाने के तहत ऑर्बिट मॉल के पीछे पीयू-4 क्षेत्र स्थित प्लॉट नंबर 230 की मल्टी के थर्ड फ्लोर पर अलाइस ब्लू ब्रोकरेज फर्म के नाम से संचालित फर्जी कार्यालय की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने योजना के मुताबिक दबिश दी और मुख्य संचालक अरुण पिता अमृतलाल लोधी (27) निवासी देवास नाका, इंदौर को पकड़ा जो मूलत: शिवपुरी के तहसील करेरा के ग्राम मामोनीखुर्द का रहने वाला है। इसके अलावा उसके सहयोगी- नीरज पिता मुंशी आदिवासी (33) निवासी देवास नाका, राहुल पिता राधेश्याम पाटीदार (31) निवासी ग्राम कालूखेड़ा, सारंगरपुर राजगढ़ हालमुकाम स्कीम नंबर 78, इंदौर को पकड़ा, जबकि सौरभ यादव को पहले से पुलिस गिरफ्त में है।
निवेशकों को फंसाने की देते थे ट्रेनिंग
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इस फर्जी कंपनी में लगभग 10-12 कर्मचारी काम करते थे। उन्हें स्क्रिप्ट आधारित कॉलिंग कर निवेशकों को फंसाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। विभिन्न स्रोतों से डिमेट अकाउंट धारकों एवं निवेशकों का डाटा खरीदा जाता था। महिंद्रा ट्रेडिंग नामक फर्जी एप का उपयोग कर निवेशकों को नकली ग्राफ एवं प्रॉफिट दिखाया जाता था। आरोपियों ने यह भी बताया गया कि उन्हें फर्जी सिम कार्ड एवं बैंक खातों के डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने वाला मिंटू उर्फ मयूर परिहार निवासी टीकमगढ़ हालमुकाम न्यू गौरीनगर (इंदौर) है जो फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम रवाना की गई है।
यह सामग्री जब्त
दबिश के दौरान कार्यालय से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक एवं आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई। इसमें 6 बेनामी सिम कार्ड, 3 बेनामी डेबिट कार्ड (स्टेट बैंक एवं जना बैंक), 15 सीपीयू, 19 मॉनिटर, मोबाइल फोन, राउटर, की-बोर्ड, माउस, विभिन्न व्यक्तियों के डाटा, रजिस्टर एवं अन्य दस्तावेज मिले जिन्हें जब्त किया गया है। जब्त सामग्री की कीमत लाखों रुपए है जिसका उपयोग संगठित साइबर ठगी में किया जा रहा था।
ऐसा था आरोपियों के काम करने का तरीका
लक्ष्य चयन- सोशल मीडिया/डाटा लीक के माध्यम से निवेशकों के मोबाइल नंबर प्राप्त करना।
प्रारंभिक संपर्क- वॉट्सएप कॉल/मैसेज के माध्यम से संपर्क कर शेयर मार्केट में भारी लाभ का लालच देना।
विश्वास बनाना- शुरुआत में अधिकृत (ऑथेंटिक) ट्रेडिंग एप डाउनलोड कराकर विश्वास जीतना।
फर्जी प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट- कमीशन बचाने का झांसा देकर महिंद्रा ट्रेडिंग नामक फर्जी एप डाउनलोड करवाना।
निवेश करवाना- फर्जी यूपीआई आईडी के माध्यम से 20 हजार से १ लाख रुपए तक की राशि जमा करवाना।
फर्जी लाभ दिखाना- एप में निवेश पर अत्यधिक लाभ दिखाना।
निकासी में बाधा- जब पीडि़त लाभ निकालने का प्रयास करता तो विभिन्न बहाने बनाकर रोका जाता
अतिरिक्त ठगी- निकासी के लिए अतिरिक्त राशि जमा कराने का दबाव बनाया जाता।
लगातार शोषण- जब तक पीडि़त रुपए देता रहता, उसे भ्रमित कर ठगा जाता।
सहयोगियों की पहचान जारी – पुलिस द्वारा महिंद्रा ट्रेडिंग एप के डेवलपर एवं तकनीकी सहयोगियों की पहचान की जा रही है। फर्जी बैंक खातों के स्रोत एवं अन्य पीडि़तों की जानकारी जुटाई जा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।









