Advertisement

उज्जैन बनेगी अब विज्ञान नगरी, काल गणना की वैश्विक कमान अब महाकाल स्टैंडर्ड टाइम के पास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री प्रधान ने किया साइंस सेंटर का लोकार्पण, 725 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देते हुए सीएम बोले

Advertisement

उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन प्राचीन काल से ही खगोल विज्ञान और काल गणना का वैश्विक केंद्र रहा है। अब समय आ गया है कि दुनिया ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) के बजाय महाकाल स्टैंडर्ड टाइम (एमएसटी) को आधार बनाए। वे शुक्रवार को महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे। सीएम ने घोषणा की कि उज्जैन को धर्म के साथ-साथ विज्ञान नगरी के रूप में भी विकसित किया जाएगा। इसके लिए १5 करोड़ की लागत से नवनिर्मित उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण किया गया। साइंस सिटी के विस्तार के लिए 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित की गई है। सीएम ने बताया कि भारतीय पद्धति सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित है, जो ग्रहों की गति के साथ सटीक तालमेल रखती है।

Advertisement

अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत समन्वय: प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन में आकर अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा की जीती-जागती प्रयोगशाला है। आधुनिक एआई उपकरण भी स्वीकार करते हैं कि काल गणना का मूल केंद्र उज्जैन ही है। उन्होंने विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट और ब्रोशर का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में आरएसएस प्रचारक सुरेश सोनी, सांसद अनिल फिरोजिया, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नीति आयोग सदस्य डॉ. वीके सारस्वत, कौशल विकास राज्यमंत्री गौतम टेटवाल (जिला प्रभारी मंत्री) और वैज्ञानिक उपस्थित थे।

Advertisement

725 करोड़ से यह होंगे सिंहस्थ के कार्य

701.86 करोड 19.80 किमी लंबा उज्जैन सिंहस्थ बायपास (4-लेन)।

22.52 करोड़ सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज होटल का विस्तार।

रोबोटिक आर्म और नैनो सैटेलाइट मुख्य आकर्षण

अतिथियों ने महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम प्रदर्शनी भी देखी। प्रदर्शनी में आरती के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई रोबोटिक आर्म, मेडिकल, एग्री और एयर टैक्सी ड्रोन तकनीक आकर्षण का केंद्र रहीा। यहां पर 120 छात्रों ने नैनो सैटेलाइट बनाने की बारीकियां भी सीखीं। इसरो के मॉडल मंगलयान, चंद्रयान सहित कई मॉडल का डेमो भी किया गया।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें