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एनडीए की तैयारी, कंपनी सचिव का लाखों का पैकेज छोड़ा, मोह-माया का किया त्याग, मन में कोई इच्छा नहीं

दीक्षार्थी बोले- पता नहीं क्यों वैराग्य को कठिन मार्ग बोलते हैं, हमें यह सांसारिक जीवन से सहज लग रहा

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन दिगंबर जैन समाज के युवाओं ने करोड़ों की संपत्ति और स्वॢणम जीवन के सारे सपने सहित घर-परिवार, दोस्त, धन-दौलत, हर सांसारिक सुख का त्याग कर दिया है। अब वे केवल मोक्षमार्ग पर चलना चाहते हैं। अपने आत्मकल्याण के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में रहने वाले 9 युवाओं ने वैराग्य का मार्ग चुन लिया है। बुधवार को सभी मुनिवेश में नजर आए हालांकि अभी पूरी तरह वैरागी नहीं हुए हैं। उज्जैन में एक बार उन्हें यह अवसर भी दिया गया कि यदि वे सांसारिक जीवन में लौटना चाहते हैं तो रास्ता खुला है।

25 अक्टूबर को बड़ौद में आचार्य विशुद्धसागर जी के सानिध्य में दीक्षा लेने के बाद वे पूर्ण रूप से मुनि बन जाएंगे। घर-परिवार सहित करोड़ों की संपत्ति का त्याग कर मुनि बनने वाले युवाओं से अक्षरविश्व ने चर्चा की तो पता चला कि सभी का दृढ़ संकल्प है जो टूट ही नहीं सकता। यह आम व्यक्ति की सोच हो सकती है कि मुनि का मार्ग कठिन है। इन युवाओं को तो सांसारिक जीवन से मुनि जीवन आसान लगता है।

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2017 में वैराग्य का भाव आ गया था मन में

हार्दिक जैन: इंदौर के रहने वाले हार्दिक जैन का जन्म 17 सितंबर 2000 को हुआ। एक साल पहले सम्मेद शिखर जी में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर लिया था। अब तक वे दो प्रतिमा व्रत पूर्ण कर चुके हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि पूर्व जन्म के कुछ कर्म होंगे जो आचार्य जी के सानिध्य में मुनि बनने का सौभाग्य मिल रहा है। साल 2010 में पहली बार आचार्य जी के प्रवचन सुने थे फिर 2017 में चातुर्मास में वे भोपाल आए थे। तभी से मन में वैराग्य का भाव आ गया था।

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आर्मी अफसर बनने गए थे, लेकिन वैरागी हो गए

तन्मय कोठारी: जबलपुर के रहने वाले तन्मय कोठारी का जन्म 10 मार्च 2003 में हुआ। वे एनडीए की रिटर्न एक्जाम पास कर चुके हैं। बचपन में आर्मी अफसर बनना चाहते थेे। जब एक्जाम पास की तो मन में आया कि आर्मी में रहकर अपने धर्म का पालन पूरी तरह नहीं किया जा सकेगा। तभी मन में संकल्प कर लिया कि अब साधारण जीवन नहीं जीना है। हालांकि वैराग्य का भाव किसी घटना को देखकर नहीं आया। बचपन से स्वाध्याय करते थे। आचार्य के प्रवचन में सुनते थे कि संसार में कुछ नहीं रखा। हमारी मंजिल तो ईश्वर और मोक्ष की प्राप्ति करना है।

इंदौर की एक फर्म में लाखों के पैकेज में करते थे जॉब

विपुल जैन उर्फ विनी: छतरपुर के रहने वाले विपुल जैन का जन्म 6 जुलाई 1995 में हुआ। घर में प्यार से उन्हें विनी कहते हैं। वे प्रोफेशन से सीएस (कंपनी सेक्रे टरी) हैं। इंदौर की एक फर्म में लाखों के पैकेज पर जॉब भी किया। कोरोनाकाल के समय इंदौर में 45 दिन तक आचार्यश्री के सानिध्य में रहे। फिर चातुर्मास में सभी साधुओं की सेवा का अवसर मिला। पता नहीं चला कब वैराग्य का भाव जागृत हुआ लेकिन धीरे-धीरे सांसारिकता से मोह खत्म होकर आध्यात्मिकता का सुख मिलने लगा। अब मुनि बनकर जैन धर्म को नई पीढ़ी और बेहतर तरीके से समझाने का प्रयास करेंगे। लोग भटक रहे हैं इधर-उधर उन्हें समझाएंगे कि जैन धर्म क्या है।

चार को छोड़ा, 40 लाख से रिश्ता जुड़ा

अंकुर जैन: छतरपुर निवासी अंकुर जैन का जन्म 19 नवंबर 1996 को हुआ। पोस्ट ग्रेज्यूएट हैं। बोले गुरुजी का सानिध्य ही वैराग्य का कारण है। मैंने एक मां को छोड़ा अब संसार की महिलाएं ही हमारी मां हैं, बहन हैं, भाई हैं। चार लोगों को छोड़ा तो 40 लाख लोगों से रिश्ता जुड़ गया।

21 वर्ष की उम्र में वैरागी बने

सिद्धम जैन: बिहार स्थित चंडी गांव के सिद्धम जैन का जन्मस्थान मप्र है। घर में उन्हें प्यार से पिंकु बोलते हैं।7 सितंबर 2002 को भिंड में जन्में पिंकु बीए पासआउट हैं। २१ वर्ष की उम्र में वे मुनि बनकर आत्मकल्याण के लिए वैराग्य मार्ग पर चल दिए।

दो प्रतिमा व्रत पूर्ण किए

हिमांशु जैन: भिंड के हिमांशु जैन का जन्म 27 अगस्त 2019 में हुआ। वे बीए ग्रेज्यूएट हैं। रायपुर में गुरुपूर्णिमा पर दो प्रतिमा व्रत पूर्ण कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वैरागी होना आसान है इसीलिए इस मार्ग को चुना। ईश्वर का सानिध्य मिलने पर कुछ भी शेष नहीं रहता।

2019 में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया

विपुल जैन: बिहार स्थित वैशाली के रहने वाले विपुल जैन का जन्म 29 जुलाई 1999 को हुआ। वे बीकॉम ग्रेज्यूएट हैं। साल 2019 में ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर लिया था। भिंड में पिता अरविंद जैन बड़े व्यवसायी हैं। परिवार में माता, बड़ी बहन और दो छोटे भाई हैं।वे बोलते हैं कि किसी घटना के कारण मन में वैराग्य नहीं आया यह तो पिछले जन्मों के पुण्यफल हैं।

धार्मिक आयोजन में मुनिश्री का रोल निभाया और मन में वैराग्य का भाव आ गया

राजेश जैन: उत्तर प्रदेश के ललितपुर के रहने वाले राजेश जैन का जन्म 26 जुलाई 1977 को हुआ। वे बीकॉम, एलएलबी तक शिक्षित हैं। इनका कहना है कि ईश्वर का आशीर्वाद मिलना था इसीलिए सांसारिक जीवन में नहीं उलझा। अब तक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक रहा। धार्मिक आयोजन में मुनिश्री की भूमिका निभाई। इस नाटिका को करते हुए मन में वैराग्य का भाव आ गया। इनका कहना है वैराग्य होकर जीवन यापन करना कहां कठिन है। सांसारिक जीवन जरूर कठिन हो सकता है। उसमें झूठ है, छल है, मोह-माया है। हमें तो सिर्फ अपने गुरुवर के सानिध्य में रहकर ईश्वर को प्राप्त करना है।

मुनिश्री सुप्रभसागर का निर्वाण दीक्षा महोत्सव कल

उज्जैन। मुनिश्री सुप्रभसागर जी महाराज का 15 वां निर्वाण दीक्षा दिवस कल 14 अक्टूबर शनिवार को मनोरमा गार्डन में मनाया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन भी होगा। मुनिश्री सुप्रभसागर जी महाराज 14 अक्टूबर 2009 को अशोकनगर में दीक्षा ग्रहण करने के साथ मुनि श्री सुप्रभसागर नाम प्राप्त किया था। मुनिश्री सुप्रभसागर निर्वाण दीक्षा दिवस सैकड़ों गुरु भक्त मंगलाचरण, गुरु पूजन, विनयांजलि करेंगे। इसके अलावा अन्य अनुष्ठानों होंगे। दोपहर 2 बजे से मुनिश्री का पूजन होगा। मुनिश्री के जीवन पर आधारित ”मोह मार्ग से मोक्ष मार्ग” नाटक का मंचन भी होगा।

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