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ऑफिस बन गया और राष्ट्रीय पक्षी मोर के घरौंदे उजड़ गए..!

निर्माण होने से स्वच्छंद विचरण का स्थान ही नहीं बचा पक्षियों के लिए

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:बिडला भवन में जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण के बाद नया ऑफिस क्या खुला 20 से 25 राष्ट्रीय पक्षी मोर को परिसर से कूच करना पडा। दरअसल पक्का निर्माण होने से मोर के घरौंदे उजड़ गए हैं।

विक्रमादित्य शोधपीठ ने देवास रोड स्थित बिडला भवन को अपना नया ठिकाना बनाया है। भवन में कई साल तक महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का संचालन होता रहा। अब 3.95 करोड़ रुपए की लागत से भवन को नया रूप देते हुए विक्रमादित्य शोधपीठ का ऑफिस बना दिया गया है। भवन के खुले परिसर में अनेक निर्माण कार्य किए हैं और इसका प्रभाव मोर पर पड़ा है। मोर अब यहां नजर नहीं आ रहे है।

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कई मोर का डेरा था

बिडला भवन, सिंधिया प्राच्यशोध संस्थान और विक्रम कीर्ति मंदिर के बीच काफी खुली जमीन में मोरों का डेरा था। निर्माण के बाद मोर नजर नहीं आ रहे है। मोर के लिए नियमित दाने-पानी की व्यवस्था करने वाले सीताराम शर्मा के अनुसार वे वर्षों से प्रात: भ्रमण के वक्त विक्रम कीर्ति मंदिर परिसर में मोर और अन्य पक्षियों के लिए दाना-पानी डाल रहे है। कोविड लॉकडाउन के दौरान सुबह जल्द आकर पक्षियों के लिए दाना-पानी डाल जाते थे। फिलहाल मोर नजर नहीं आ रहे है। संभवत: बिडला भवन की खुली जमीन पर व्यापक पैमाने पर निर्माण होने और बीते कुछ दिनों से निर्माण के चलते खटपट और शोर की वजह से मोर कहीं ओर पलायन कर गए है।

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