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कृषि विस्तार अधिकारियों की मेहनत से 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड मिला पर हमारे हिस्से केवल बदनामी

प्रांतीय साधारण सभा एवं बैठक में रखी 14 सूत्रीय मांगे

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उज्जैन। हमारे मैदानी अमले की मेहनत, लगन और समर्पण की उपेक्षा हमेशा से की जाती रही है। इस विभाग को मजबूत बुनियाद यदि किसी ने दी है तो वह है हमारा कैडर-ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी। बरसों तक कृषि उत्पादकता पुरस्कार यदि मिले हैं तो कहीं न कहीं योगदान का बड़ा हिस्सा, इन्हीं के नाम है।

एक दो बार नहीं 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड मिला है तो इन्हीं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की अटूट मेहनत भी इसमें शामिल है। लेकिन बहुत पीड़ा होती है जब हमारे हिस्से आती है तो केवल बदनामी आती है। मुख्यालय पर न रहने के इल्जाम में हमारे सारे परिश्रम को धो दिया जाता है। दौरा न करने के लिए हमें दोषी ठहराया जाता है। नकारा और कामचोर कहा जाता है। उक्त बात म.प्र. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ की प्रांतीय साधारण सभा एवं बैठक में प्रांताध्यक्ष मनोहर गिरी ने कही।

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उन्होंने कहा कि मुझे बहुत पीड़ा होती है कि कोई तो हो इतने बड़े डिपार्टमेंट में जो यह कह सके कि अरे 4-4 सेंटर देने वालों, बता तो दो कि एक आरएईओ बिना साधन-सुविधा के एक साथ कितनी जगहों का दौरा कर ले। नाम मात्र के मिनीकिट लेकर कितनों को खुश करे और कितनों को नाराज़ कर ले। एमआर मंसूरी ने बताया कि भोपाल में आयोजित बैठक के दौरान 14 सूत्रीय मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इस बैठक में उज्जैन से बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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