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कोरोना तेरा सत्यानास…

हर इंसान की होती एक कहानी
सब के मुंह में है एक रसना रानी
इससे भाती है चीजें मीठी और खट्टी
किसी किसी की होती है बहुत चट्टी

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क्या बड़े बुरे दिन है इसके आए
हर कोई इसे उबला ही खिलाए
किसी मुंह की किस्मत एकदम फूटी
सुबह से शाम खाये सिर्फ जड़ी बूटी

लॉक डाउन में है सब कुछ बंद
ना मिले रबड़ी ना ही कलाकंद
लगता है चलेगा लॉकडाउन अखंड
भूल गई मैं तो कैसा लगता श्रीखंड

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पूरे महीने से देखा नहीं आलू बड़ा
भजिए वाला भी अपने घर में पड़ा
खा रही हूं कई दिनों से खिचड़ी थूली
पूड़ी कचौड़ी का स्वाद भी अब भूली

खाने पीने वालों पर संकट बड़ा भारी
गांव शहर की होटल बंद हो गई सारी
सबसे ज्यादा हुआ पीने वालों का कबाड़ा
ब्रांड सारे गायब हुए गिलास में अब काड़ा

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साहब यही है सारे झगड़े की जड़
चीन में इसने ही खाया चमगादड़
सारे विश्व को दिया इसने बड़ा त्रास
सब कह रहे कोरोना तेरा सत्यानास

-सुरेन्द्र सर्किट

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