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चरक अस्पताल में 45 मिनट बत्ती गुल जनरेटर में 50 लीटर डीजल डाला तब चालू हुई

डॉक्टरों ने हाथों में टॉर्च थामकर किया इलाज और ड्रेसिंग, फॉल्ट के चलते मेन लाइन बंद होने से बने हालात

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। संभाग के सबसे बड़े चरक अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव किस तरह बना हुआ है, इसका एक और उदाहरण गुरुवार सुबह उस समय नजर आया जब अस्पताल की बत्ती गुल हो गई। अस्पताल प्रबंधन के पास जनरेटर में डीजल डालने तक की राशि नहीं थी, लिहाजा करीब 45 मिनट तक अंधेरे के हालात बने रहे। इसके बाद आनन-फानन में 50 लीटर डीजल डाला गया तब जाकर जनरेटर चालू हुआ और बिजली चालू हो सकी।

मिली जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 6 बजे बिजली की मेन लाइन में फॉल्ट हुआ था जिसके चलते हॉस्पिटल की बिजली गुल हो गई। इसके चलते अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी मच गई। करीब 45 मिनट तक यही हालात रहे जिसके चलते डॉक्टरों को टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज किया और ड्रेसिंग भी इसी तरह की गई। हालांकि, यूपीएस लगे होने ओपीडी के कम्प्यूटर चालू थे जिससे मरीजों की पर्ची बनाई गई।

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आनन-फानन में डाला डीजल
अस्पताल के विद्युत नियंत्रण कक्ष में जो जनरेटर लगे हैं उसके टैंक की क्षमता 150 लीटर डीजल की है लेकिन उसमें डीजल ही नहीं था। अस्पताल प्रबंधन के पास राशि नहीं होने से करीब ४५ मिनट तक अंधेरे में ही मरीज और उनके परिजनों को रहना पड़ा। इसके बाद व्यवस्था कर 50 लीटर डीजल लाकर उसे जनरेटर में डाला गया तब जाकर लाइट चालू हो सकी। इसी दौरान मरीज और उनके परिजनों परेशान होकर भटकते रहे।

इस तरह से परेशान हुए मरीज
जयसिंहपुरा में रहने वाली सारिका दीवान के पैर में फ्रैक्चर हुआ है। परिजन उसे व्हीलचेयर पर लेकर चरक अस्पताल पहुंचे थे। उन्हें चौथी मंजिल पर जाना था लेकिन अस्पताल में लाइट नहीं होने से अंधेरा था और लिफ्ट भी बंद थी। ऐसे में सीढिय़ां चढऩा मुमकिन नहीं था जिसके चलते वह परेशानी होती रहीं।

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महाकाल सिंधी कॉलोनी निवासी चंद्रप्रकाश भाटी अपनी बहू को डिलेवरी के लिए चरक अस्पताल लेकर आए थे लेकिन इसी दौरान बत्ती गुल हो गई। लिफ्ट बंद होने से उनकी बहू को सीढिय़ों से नहीं ले जा सकते थे। ऐसे में लाइट आने का इंतजार करते रहे। 45 मिनट बाद लाइट आई तो उन्हें लिफ्ट से लेकर गए।

10 में से 7 लिफ्ट भी बंद
चरक में बुनियादी सुविधाओं की हालत इतनी बदतर है कि लंबे समय से यहां कि १० में से ७ लिफ्ट या तो खराब है या फिर बंद है। जो तीन लिफ्ट चालू हैं, उनकी भी हालत दयनीय है, कोई लिफ्ट हिल रही है तो किसी का सेंसर खराब है। इतना ही नहीं यह चलते-चलते कभी भी अचानक से बंद हो जाती है। इनमें मरीजों के फंसने के कई मामले सामने आ चुके हैं।

इनका कहना
आज मैं रतलाम में हूं। यहां परीक्षा ले रही हूं इसलिए अभी चर्चा नहीं हो पाएगी।
– डॉ. संगीता पलसानिया, सिविल सर्जन

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