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जिला अस्पताल में भर्ती होकर उपचार कराना है तो कंबल, चादर घर से ले जाना

फटे गद्दे और फटी चादर पर रहना पड़ रहा है मरीजों को, मरीज बोले… मजबूरी है साहब

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन यदि आप किसी भी प्रकार की बीमारी का उपचार जिला अस्पताल में भर्ती होकर कराना चाहते हैं तो गादी पर बिछाई जाने वाली चादर और ओढऩे के लिये कम्बल घर से ही लेकर जाना होगा। वार्ड के कर्मचारी अब मरीजों को चादर-कम्बल उपलब्ध नहीं कराते। यहां भर्ती मरीजों का कहना है कि गरीबी की मजबूरी है साहब नहीं तो ऐसे नरक में कौन उपचार कराता।

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किस वार्ड के मरीज की क्या है स्थिति

पुरुष मेडिसीन वार्ड- यहां भर्ती मरीज राजेश परमार निवासी जयसिंहपुरा ने बताया कि पेट दर्द होने पर परिजनों ने दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया था। गादी पर चादर नहीं थी तो घर से मंगवाइ्र। ईश्वर पिता तुलसीराम निवासी सोंडा देवास को दो दिन पहले खून की उल्टियां होने पर परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया वह भी कम्बल घर से लेकर आया था।

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डी वार्ड महिला मेडिसीन- कलाबाई निवासी बडऩगर को बीमारी के चलते इस वार्ड में भर्ती किया गया। उसके बेड पर चादर नहीं थी। कलाबाई ने कहा कि हमने नर्स से चादर मांगी तो जवाब मिला कि घर से लेकर आओ।

बी वार्ड पुरुष सर्जिकल- राधेश्याम निवासी चंदूखेड़ी को रात में परिजनों ने घायल होने पर वार्ड में भर्ती कराया। उसके पलंग पर बिछा गद्दा फटा था। चादर और कम्बल भी नहीं थे। रात भर वह सर्दी में ही पड़ा रहा। इसी वार्ड के अमजद निवासी तराना के पास भी कम्बल नहीं था।

एफ एवं ईएनटी वार्ड- तबरेज निवासी आगर नाका को इस वार्ड में कम्बल चादर दोनों ही नहीं दिये गये थे। श्यामूबाई और भूपेन्द्र निवासी नागदा ने बताया कि रात भर ठंड में ठिठुरते रहे। स्टाफ के लोगों ने घर से कम्बल मंगाने की बात कही लेकिन नागदा से कम्बल लाना संभव नहीं था।

सर्द रात में मरीजों को कंबल नहीं

वर्तमान में सर्दी सीजन के चलते रात का न्यूनतम तापमान 1१ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे में सरकारी अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को पलंग पर चादर और कम्बल उपलब्ध नहीं कराये जा रहे। स्टाफ के लोग उन्हें घर से रजाई, कम्बल और चादर लाने की बात कहते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वार्डों में शहर ही नहीं बल्कि जिले भर के मरीज भर्ती होते हैं ऐसे में उनका घर भी पास नहीं होता और ठंड से बचने के लिये उन्हें किराये से रजाई, कम्बल लाना पड़ते हैं।

जिन्हें मिले वह भी फटे और बदबूदार

ऐसा नहीं कि वार्डों में भर्ती सभी मरीजों को चादर कम्बल उपलब्ध नहीं कराये जा रहे। इनमें से कुछ मरीज किस्मत वाले भी हैं जिन्हें वार्ड में भर्ती होने के बाद अस्पताल स्टाफ द्वारा चादर और कम्बल दे दिये जाते हैं, लेकिन इनकी हालत ऐसी है कि उपयोग करने के बाद मरीज और बीमार हो जाये। अधिकांश मरीजों के पास उपलब्ध कम्बल फटे थे जिनसे ठंड से बचना मुश्किल था। उनमें से बदबू आ रही थी वहीं चादर भी गंदे थे।

एक माह में दो बार धुलने दिये लेकिन वापस नहीं आये

एफ वार्ड सर्जिकल, ईएनटी वार्ड के स्टाफ से मरीजों को चादर कम्बल नहीं दिये जाने के संबंध में जानकारी चाही गई तो पता चला कि 20 नवंबर को 10 और 9 दिसंबर को 17 चादर धुलने दिये थे लेकिन आज तक उक्त चादर धुलकर वापस नहीं आये हैं। हमारी भी मजबूरी है यदि स्टॉक में उपलब्ध होते हैं तो मरीजों को देते हैं नहीं होने पर ही अपनी व्यवस्था स्वयं करने के लिये कहा जाता है।

जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को कम्बल और चादर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं इसकी जानकारी मुझे नहीं है, मैं अभी फील्ड में पानबिहार में हूं। यदि अव्यवस्था है तो सिविल सर्जन को निर्देशित करता हूं।
डॉ. दीपक पिप्पल, सीएमएचओ

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