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दीया तले अंधेरा : विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की ‘बी ++’ ग्रेड को ‘ए’ करने की कोशिश

पहले मूल्याकंन में एसएसआर रिपोर्ट में कई कॉलम खाली छोड़ दिए

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रिव्यू के लिए पेपर वर्क में जुटा विश्वविद्यालय प्रशासन

उज्जैन।विक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन भले की सभी को और खुद को यह कहकर दिलासा दें रहा है कि विवि की गे्रड में किसी तरह की कोई गिरावट नहीं हुई है और ‘बी ++Ó ग्रेड ‘ए’ के समकक्ष है। नए मूल्यांकन सिस्टम के कारण ‘बी ++’ ग्रेड मिली है। यह बात किसी के गले नहीं उतरने के बीच में विवि प्रशासन ग्रेड रिव्यू के लिए पेपर वर्क में जुटा हैं।

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विक्रम विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों द्वारा नैक मूल्यांकन के लिए प्रस्तुत सेल्फ स्टेडी रिपोर्ट पर नैक से ‘बी ++’ ग्रेड मिलने के कारण उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विक्रम विश्वविद्यालय की जमकर किरकिरी हो रही है। संस्था की कार्यप्रणाली और दावें को लेकर सवाल खड़े हो रहे है। विक्रम विश्वविद्यालय की साख ग्रेड रिव्यू पर टिकी है। विश्वविद्यालय के जिम्मेदार एसएसआर (सेल्फ स्टेडी रिपोर्ट) में कमी रहने का हवाला देकर रिव्यू की बात कर रहे हैं। रिव्यू के लिए रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी नए शिक्षकों को दी है।

सूत्रों का कहना है कि नैक से पियर टीम की मूल्यांकन के दौरान जमकर आवभगत में लगे रहे। विक्रम विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों ने दिल खोलकर खर्चा किया। दूसरी ओर पूर्व में भेजी गई एसएसआर रिपोर्ट में कई कॉलम खाली छोड़ दिए। नतीजतन नैक से पियर टीम द्वारा विश्वविद्यालय को कम अंक दिए गए। यह ए ग्रेड प्राप्त करने लक्ष्य से कम रहे। इसी के आधार पर नैक टीम ने विक्रम विश्वविद्यालय को बी ++ की ग्रेड प्रदान की।

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पहले मूल्यांकन में….

हालांकि जमकर आलोचना होने पर विवि प्रशासन की ओर से लगातार सफाई दी जा रहीं है कि बी ++ ग्रेड किसी भी स्थित में ए ग्रेड से कम नहीं है। वहीं, अब विक्रम विवि प्रशासन एसएसआर रिपोर्ट में खाली रहे कॉलम के लिए दस्तावेज तैयार कर रहा है,ताकि रिव्यू में कोई चूक नहीं रहे।

एसएसआर पर अपील के प्रावधान स्पष्ट नहीं: नैक के नियम में पियर टीम के निरीक्षण को लेकर अपील करने का प्रावधान है, लेकिन एसएसआर रिपोर्ट को लेकर अपील पर सुनवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। जानकारों के मुताबिक एसएसआर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ तैयार कर पहुंचाते हैं।

इसमें कोई कमी रह जाती है तो अपील में जाने पर नई एसएसआर को मानने या नहीं मानने का अधिकार नैक को है। इसके बाद ही नैक पियर टीम के निरीक्षण करती है। वैसे भी अपील करने के लिए 45 दिन का समय 18 अक्टूबर से शुरू हो गया है।

बता दें कि विक्रम विश्वविद्यालय ने नैक कराने के लिए अक्टूबर 2021 में आईआईक्यू (इंटरनल क्वालिटी एसेसमेंट रिपोर्टं) प्रस्तुत की थी। इसके 6 महीने बाद एसएसआर (सेल्फ स्टडी रिपोर्ट) पहुंचाई गई। जाहिर है विवि को रिपोर्ट तैयार करने और नैक तक पहुंचाने में लंबा समय मिला है।

अनुभवी विशेषज्ञों से मदद: कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडे पहले ही कह चुके हैं कि ग्रेड को लेकर विश्वविद्यालय अपील करेगा। इसीलिए अब विश्वविद्यालय के पुराने अनुभवी शिक्षकों को दस्तावेज चेक करने और सावधानी पूर्वक भरकर अपील करने की जिम्मेदारी दी है। यह जिम्मेदारी भी उन्हीं शिक्षकों को दी है, जिनके माध्यम से वर्ष 2017 में रिपोर्ट तैयार कराई गई थी, जिसके बाद विश्वविद्यालय को ए ग्रेड मिला था।

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