पहली बार में ही भरोसा जगा गया वनमेला, ग्रामीण बोले- मोहन भैया ने मजो लई दियो

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शहद की मीठी गंध, जड़ी-बूटियों की महक, बांस का सुंदर फर्नीचर, टैरेस गार्डन पर लगाने के लिए ऑगेर्निक सब्जियों का संसार,जंगली लहसुन, प्याज, केले, चारोली, हरड, आंवला, ब्राम्ही, अर्जुन छाल जैसी अनूठी और आकर्षक सामग्री वाले महाकाल वनमेले का पहला संस्करण उज्जैनवासियों के दिल पर गहरी छाप छोड़ गया।
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अक्षरविश्व टीम जब मेला देखने पहुंची तो ग्रामीण और शहरी कौतुक से भरी सामग्री देखकर यह बोलने से नहीं चूके कि मोहन भैया (सीएम डॉ. मोहन यादव) ने मजो लई दियो। प्रचार-प्रसार ठीक से नहीं होने से शुरुआती दो दिन भीड़ कम रही लेकिन शनिवार, रविवार और सोमवार को बड़ी
संख्या में जुटे सैलानियों ने यह कमी पूरी कर दी।
दरअसल वनविभाग ने 11 से 16 फरवरी तक राज्य स्तरीय वन मेला दशहरा मैदान में आयोजित किया था। इसमें प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के वन उत्पाद प्रदर्शन और बिक्री के लिए आए थे। उज्जैन के कारोबार को बढ़ाने के लिए सीएम डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को मेला लगाने के निर्देश दिए थे। पहली बार लगे मेले में पहुंचे लोग यहां आई सामग्री और जड़ी-बूटियों को देखकर हतप्रभ थे। उन्होंने इनकी खूबी जैसे ही अन्य लोगों को बताई पर्यटकों का सैलाब मेले में उमडऩे लगा।
रविवार-सोमवार को तो संख्या काफी बढ़ गई। डीएफओ अनुराग तिवारी बताते हैं कि सीएम साहब की पहल पर लगाए मेले को अच्छा रिस्पांस मिला। मेले के पीछे सीएम की दृष्टि थी। वह वन उत्पादों,वनवासी श्रम और पारंपरिक चिकित्सा को केंद्र में रखकर उज्जैन के विकास का नया खाका खींचना चाहते हैं। उनकी इस परिकल्पना पर मेला पूरा खरा उतरा। रोजाना तीस हजार से ज्यादा लोगों ने मेला देखा। वन उत्पाद की बिक्री भी खूब हुई। करीब 50 लाख से ज्यादा की औषधि भी बिकी। वैद्यों को भी नया मंच मिला। उन्होंने करीब 2 हजार लोगों का परीक्षण किया। तिवारी के अनुसार अगले साल से मेले का स्वरूप और विस्तृत किया जाएगा।
पहली बार इतना व्यवस्थित आयोजन
उज्जैन में यूं तो कई मेले लगते हैं। कार्तिक मेला, हस्तशिल्प मेला, विक्रम व्यापार मेला इनमें प्रमुख होते हैं। इनमें से वनमेला आयोजन की दृष्टि से एकदम अलग था। व्यवस्थित डोम, वन उत्पाद पर रखे इनके नाम, मेले की सजावट, फ्लोरिंग एकदम जुदा थी। फूड जोन, सीटिंग एरिया, एडवाइज एरिया बहुत व्यवस्थित थे। इन्हीं कारणों से लोग यहां खींचे चले आएं।









