मयूरभंज छाऊ से कलाकारों ने बांधा समां

नाट्य समारेाह : भूमि सूर्य वीरगाथा में नृत्य अनुशासन की अभिव्यक्ति
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विक्रमोत्सव के नाट्य समारोह में भूमि सूर्य वीरगाथा में नृत्य के अनुशासन की झलक दिखाई दी। मयूरभंज छाऊ नृत्य प्रस्तुत कर रहे कलाकारों ने समां बांध दिया। संस्कृति विभाग, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विक्रम नाट्य समारोह की आठवीं शाम कालिदास अकादमी संकुल में नृत्य नाटिका भूमि सूर्य वीरगाथा की लावण्य पूर्ण प्रस्तुति को दर्शकों ने जमकर सराहा। नृत्य निर्देशक कुलेश्वर कुमार ठाकुर के निर्देशन में याज्ञना परफॉर्मिंग आर्ट्स नई दिल्ली के नृत्यकारों ने मयूरभंज छाऊ नृत्य से समां बांध दिया। गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित नृत्य नाटिका में 18 वीं सदी की राज कहानी को व्यक्त किया गया है।
राज्य में राजा और गुरु की महिमा को नृत्य भंगिमाओं से बताया गया। नृत्य अनुशासन में कलाकार गुरु से भैरवी पूजा, गुरु पूजा ,योग और नृत्य तकनीक की शिक्षा ग्रहण कर दक्ष बन जाता था। राजा के राज्य में शेर आन से डरने, गुरु की आज्ञा से शेर को पकडऩे एवं इस अवसर पर गांव में होने वाले उत्सव को नृत्य के जरिये मंचित किया गया। कुलेश्वर कुमार ठाकुर के इस रंजक मंचन ने दर्शकों का मन मोह लिया। 15 नृत्यकारों ने विभिन्न पात्रों को जीवंत कर दिखाया।
दक्ष नर्तक कुलेश्वर, महेश, सुमित मंडल, प्रशांत, कालियाआयुषी, अंकित ,प्रभाकर, जय सिंह, अर्जुनदेव मलिक, मोहित, अर्चना, सोमली,समृद्धि ने अपनी नृत्य साधना से नाटिका को सफलता प्रदान की। अतुल मिश्रा की लाइटिंग और माया धार के संगीत निर्देशन से सजी इस प्रस्तुति में नीलू कुमारी ने आभूषणों से सजधज की थी। नृत्य नाटिका का निर्देशन कर रहे कुलेश्वर कुमार ठाकुर ने अपनी 10वीं प्रस्तुति को विक्रमोत्सव में सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। वे यमुना परफॉर्मिंग आर्ट्स के बैनर तले इस कहानी को इंडिया गेट, नईदिल्ली, नेपाल, जांबिया में प्रदर्शित कर चुके हैं।
छाऊ 18वीं सदी की कला
छाऊ कला 18वीं शताब्दी की युद्धप्रधान नृत्य शैली को दर्शाती है। प्रशिक्षण की शुरुआत देवी भैरवी को नमन से होती है। कलाकारों की कलाई पर बंधा कलावा संकल्प और परंपरा के प्रति समर्पण दिखाता है। इसमें शरीर को सुदृढ़ और लचीला बनाने के लिए मूल व्यायाम कराए जाते हैं और फिर हथियार संचालन का अभ्यास कराया जाता है। चालीस और उफाली जैसी पारंपरिक तकनीक युद्धक प्रकृति को दर्शाती हैं। यह भारतीय आदिवासी वीर सैनिकों की कला के रूप में पहचानी जाती है। कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान पूर्व विधायक राजेंद्र भारती, समाजसेवी तरुण उपाध्याय ने किया।
आज ‘आदि-अनंत’ प्रस्तुति
मंगलवार को कालिदास अकादमी संकुल भवन में शाम 7.30 बजे से संगीता शर्मा (नई दिल्ली) के निर्देशन में ‘आदि-अनंत’ की प्रस्तुति होगी।
समीक्षा डॉ.जफर महमूद










