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महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति ने नहीं शुरू किये ऑफलाइन पंजीयन काउंटर

दर्शन के नाम पर गरीबों से फिर भेदभाव

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स्मार्ट फोन नहीं और रुपये नहीं, तो मंदिर में प्रवेश भी नहीं

दर्शनार्थियों की मांग : पुन: चालु किये जाए ऑफलाइन काउंटर और खाली स्लॉट में दिया जाए उसी समय प्रवेश

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उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन शुरू करने के बाद मंदिर समिति द्वारा बनाई गई व्यवस्था फिर विवादों में घिर गई है। पिछले बार किया गया प्री बुकिंग या सशुल्क दर्शन का निर्णय इस बार फिर लागू कर दिया गया है। जिसके तहत यदि किसी के पास स्मार्ट फोन नहीं है और 250 रू. सशुल्क दर्शन के भी वह नहीं दे सकता है ऐसे में वह दर्शन करने का पात्र नहीं है।

अभी मंदिर प्रबंध समिति ने 3500 श्रद्धालुओं को ऑन लाइन पंजीयन के माध्यम से प्रतिदिन 7 विभिन्न स्लॉट में दर्शन की सुविधा दे रखी है। इसी प्रकार सशुल्क दर्शन में 250 रू. देकर भी भक्त दर्शन करने जा रहे हैं। जो गरीब है वे इस सुविधा से वंचित है। जिनके पास पंजीयन के लिए स्मार्ट फोन और जेब में 250 रु. नहीं है उनके लिए मंदिर समिति द्वारा मंदिर में प्रवेश निषेध किया गया है। शहरवासियों की मांग है कि समिति इस दिशा मे विचार करे और ऑफ लाइन दर्शन की सुविधा प्रदान करें।

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पुन: शुरू की जाए ऑफलाइन काउंटर

गत वर्ष भी अनलॉक के बाद जब पुन: मंदिर में दर्शन व्यवस्था शुरू की गई तब यही व्यवस्था लागू की थी। जिसका विरोध पूरे शहर में हुआ। इसी व्यवस्था के विरोध में सत्ताधारी दाल भाजपा और विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेताओं ने एक सुर में इस निर्णय से अपनी असहमति जताई थी।

संत समाज भी इससे खासा नाराज था और इस निर्णय की भनक जब धर्मस्व मंत्री उषा ठाकुर को लगी तो उन्होंने तत्काल इस व्यवस्था में परिवर्तन करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद मंदिर परिसर और उसके समीप 2 ऑफलाइन काउंटर स्थापित किये गए थे जहां से निशुल्क दर्शन की बुकिंग और खाली पड़े स्लॉट में भी निशुल्क दर्शन की व्यवस्था की गई। अब मंदिर समिति को चाहिए की वह शीघ्र इसी व्यवस्था को पुन: प्रारम्भ करे जिससे की मंदिर में सभी को प्रवेश मिल सके।

जो श्रद्धालु सीधे दर्शन करने आ जाते हैं उन्हें भी दर्शन कराने की व्यवस्था की जाए। मंदिर दान से चलता है शुल्क से नहीं। दान श्रद्धालु की स्वेच्छा से निर्धारित होता है। जिन्हे मोबाइल चलना नहीं आता उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोकना बेहद गलत है। समिति पुन: ऑफलाइन काउंटर शुरू करे और सभी को कोरोना गाइड लाइन का पालन कराते हुए निशुल्क दर्शन कराने की व्यवस्था स्थापित करे।-डॉ चिंतामणी मालवीय , पूर्व सांसद और उपाध्यक्ष प्रदेश भाजपा

कुछ सवाल जिनके मंदिर समिति को देने होंगे जवाब

निशुल्क दर्शन के लिए 3500 लोगों की सीमा निर्धारित है, सशुल्क दर्शन के लिए अधिकतम संख्या कितनी है?

जिन दर्शनार्थियों के पास स्मार्ट फ़ोन नहीं है और जेब में 250 रु भी नहीं उनके दर्शन के लिए क्या व्यवस्था है?

पिछले वर्ष निशुल्क रजिस्ट्रेशन के लिए ऑफलाइन काउंटर शुरू हुए थे। अब तक वे चालु क्यों नहीं किये गए?

इन सवालों के जवाब के लिए मंदिर प्रशासक नरेंद्र सूर्यवंशी से संपर्क करना चाहा लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

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