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महाशिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल के पंचमुखी दर्शन

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महाशिवरात्रि महापर्व के समापन के बाद बुधवार को भगवान महाकाल ने भक्तों को पंचमुखी स्वरूप में दर्शन दिए। श्री शिव पंचानन पंच मुखौटा के दर्शन कर भक्त भी भावविभोर हो गए। वर्ष में केवल एक बार फाल्गुन शुक्ल पक्ष के चंद्र दर्शन पर भगवान महाकाल के पंच मुखारबिंद में श्री छबीना, श्री उमामहेश, श्री होलकर, श्री मनमहेश, श्री शिव तांडव स्वरूप में महाकाल भक्तों को दर्शन देते हैं।

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दरअसल, शिव नवरात्रि के 9 दिनों तक भगवान महाकाल अलग-अलग दिव्य रूपों में भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान देशभर के अलग-अलग राज्यों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। महाशिवरात्रि और उसके अगले दोपहर में होने वाली भस्मार्ती में शामिल होने के लिए 8 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान जो श्रद्धालु मंदिर नहीं पहुंच सके, उनके लिए महाशिवरात्रि के बाद आने वाला एक विशेष दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

बुधवार को बाबा महाकाल ने पंच मुखौटे स्वरूप में दर्शन दिए। यह स्वरूप बेहद दुर्लभ और दिव्य माना जाता है। मान्यता है कि पंचमुखी रूप के दर्शन से शिव नवरात्रि के नौ दिनों के दर्शन का पूरा फल प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल का पंच मुखौटे स्वरूप में विशेष शृंगार किया गया। इस स्वरूप के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा की एक झलक पाकर धन्य हो गए। इस दौरान बाबा महाकाल को दूल्हा स्वरूप में सजाया गया।

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नेपाल के प्रतिनिधिमंडल ने किए बाबा के दर्शन
नेपाल से नावा डेलिगेशन के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस प्रतिनिधिमंडल के कुल 14 विशेष सदस्य शामिल रहे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिय़ा ने अतिथियों का स्वागत किया। डेलिगेशन में शामिल सदस्यों ने कहा कि इतने अच्छे दर्शन हुए कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

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