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मातृ भाषा में दी जाए शिक्षा : राज्यपाल

HSNC विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले महाराष्ट्र के गवर्नर

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मुंबई, 13 फरवरी। अध्ययन और अध्यापन के कार्य की मातृ भाषा में व्यवस्था करना सभी शैक्षणिक संस्थानों का मूल कर्तव्य है। हमें इस बात को समझना होगा और उसके अनुसार कार्य योजना तैयार करनी पड़ेगी। यह उद्गार महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने एच एस एन सी विश्वविद्यालय, मुंबई के द्वितीय दीक्षांत समारोह में व्यक्त किये। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि मैंने पद संभालते ही प्रदेश के सभी कुलपतियों के साथ हुई बैठक में यह निर्देश दिया कि वे इंजीनियरिंग और मेडिकल की पुस्तकों को मराठी में उपलब्ध कराने की तत्काल व्यवस्था करें।

एच एस एन सी विश्वविद्यालय का ज़िक्र करते हुए श्री बैस ने कहा कि भले ही यह कहा जा रहा है कि यह विश्वविद्यालय 4 साल पुराना है। लेकिन इससे संबंद्ध कॉलेजों को देखें, तो यह कहना ज्यादा उचित है कि इसका इतिहास 70-75 साल का है। हमारी श्रद्धा है उन महान शिक्षाविदों के प्रति जो ख़ुद तो सिंध प्रांत से खाली हाथ आये, लेकिन इस मायानगरी को शिक्षा रूपी अक्षय धन से समृद्ध करने का पुनीत कार्य किया। यदि हम इस विश्वविद्यालय की बात करें और इसकी उपलब्धियों को देखें तो हम कह सकते हैं कि इसका भविष्य बड़ा ही उज्ज्वल और समृद्ध है। उन्होंने कहा कि अल्प समय में ही इस विश्वविद्यालय ने अपनी जो जगह बनाई है, वह बहुत सराहनीय है।

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विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने विश्वविद्यालय की वर्तमान उल्लेखनीय एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमलता बागला ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों, उपलब्धियों, परीक्षा परिणाम, शोध कार्य एवं प्रोत्साहन योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण, समाज हित एवं जनहित में किये जा रहे प्रयासों पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

इस अवसर पर कुलाधिपति रमेश बैस ने शीर्ष स्थान प्राप्त करने सभी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान 3607 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर की उपाधि प्रदान की गई। द्वितीय दीक्षांत समारोह में एच एस एन सी बोर्ड के अध्यक्ष अनिल हरीश, निवर्तमान अध्यक्ष किशु मनसुखानी, ट्रस्टी माया साहनी, आमंत्रित कुलपति गण एवं उच्चाधिकारी, सभी संकायों के अधिष्ठाता, संबंद्ध कॉलेजों के प्राचार्य, उप प्राचार्य, बीओएस अध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

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