विक्रमोत्सव: तीन अभा कवि सम्मेलन में पहला आज

जनजातीय बोलियों से गूंजेगी कालिदास अकादमी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। विक्रमोत्सव इस बार साहित्य के रंग में सराबोर होने जा रहा है। काव्य प्रेमियों के लिए विशेष सौगात लाते हुए इस वर्ष तीन अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
आयोजन समिति के राजेश सिंह कुशवाह ने बताया कि विविध भाषाओं, बोलियों और समसामयिक विषयों पर केंद्रित ये आयोजन विक्रमोत्सव को एक राष्ट्रीय पहचान दिलाएंगे।
लोक रंजन श्रृंखला के तहत 1 मार्च को कालिदास संस्कृत अकादमी के अभिरंग सभामंडप में पहला सम्मेलन होगा। यह पूरी तरह से भारतीय जनजातीय भाषाओं और क्षेत्रीय बोलियों पर केंद्रित होगा। इसमें हाड़ौती, भीली, मेवाड़ी, निमाड़ी, छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी, अवधी और मालवी जैसी बोलियों के दिग्गज कवि अपनी प्रस्तुति देंगे।
सम्मेलन में प्रमुख रूप से मुकुट मणिराज (कोटा), रतन प्रेमी (पलसूद), राजकुमार बादल (भीलवाड़ा), वीरेंद्र चौरे (पंधाना), किशोर तिवारी (भिलाई), बादशाह प्रेमी (देवरिया), अजय प्रधान (बाराबंकी), विक्रम विवेक (तराना) और मालवी व्यंग्यकार शशांक दुबे (उज्जैन) काव्य पाठ करेंगे। संचालन अशोक भाटी (उज्जैन) करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर 7 मार्च को कालिदास अकादमी में ही देश की ख्यातनाम विदुषी कवियत्रियां जुटेंगी। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, मानवीय संवेदनाओं और उनके संघर्षों को समर्पित होगा। देशभर की कवियत्रियां अपनी रचनाओं के माध्यम से महिला चेतना का स्वर बुलंद करेंगी।
14 को टॉवर चौक पर अभा कवि सम्मेलन
विक्रमोत्सव का पारंपरिक और सबसे प्रतीक्षित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन 14 मार्च को टॉवर चौराहे पर आयोजित किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि दिनेश दिग्गज के संयोजन में होने वाला यह आयोजन जनसामान्य के बीच बेहद लोकप्रिय है। नगर के हृदय स्थल पर होने वाले इस सम्मेलन में देशभर के नामचीन कवि श्रोताओं को काव्य रस से सराबोर करेंगे।
इनका कहना
इन आयोजनों के माध्यम से विक्रमोत्सव न केवल साहित्यिक चेतना को जगा रहा है, बल्कि भारत की विविध भाषाई संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का काम भी कर रहा है।
राजेशसिंह कुशवाह
आयोजन समिति सदस्य










