विद्यालय की पहचान संस्था के शिक्षक तथा विद्यार्थियों से: उपाध्याय

अरविंद सार्धशती व्याख्यानमाला का आयोजन किया
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उज्जैन। श्री अरविंद सोसायटी उज्जैन एवं मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के तत्वावधान में शा. उमावि चिंतामण जवासिया में श्री अरविंद सार्धशती व्याख्यानमाला अंतर्गत महर्षि अरविंद के जीवन पर आधारित परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में मुख्य अतिथि मप्र जनअभियान परिषद उपाध्यक्ष विभाष उपाध्याय, विशेष अतिथि डॉ. लतिका व्यास थीं। आनंद मोहन पंड्या, शिवप्रसाद मालवीय, सचिन शिम्पी, अरूण व्यास एवं जय दीक्षित अतिथि थे।
अध्यक्षता प्राचार्य अमितोज भार्गव ने की। अतिथियों का स्वागत के.के. माहेश्वरी, डॉ. संगीता श्रीवास्तव, एन.एस. चौहान, एवं अनामिका दवे ने किया। मुख्य अतिथि उपाध्याय ने कहा कि किसी भी विद्यालय की पहचान उस संस्था के शिक्षक तथा संस्था के पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थियों से ही होती हैं, यदि विद्यार्थी शिक्षक को भगवान मानकर शिक्षा ग्रहण करते हैं तो जीवन में आने वाली समस्याओं का स्वत: ही समाधान हो जाता है। उपाध्याय ने बताया कि संपूर्ण देश में महर्षि अरविंद के जन्मोत्सव के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विभिन्न संस्थाओं में उनके जीवनवृत्त पर व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जा रहा है। डॉ. व्यास ने महर्षि अरविंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से प्रकाश डाला। प्राचार्य भार्गव ने महर्षि अरविंद के आदर्शो को अपने जीवन में आत्मसात करने की बात कही। संचालन लोकनाथ मिश्रा ने किया तथा आभार एन.एस. चौहान ने माना।