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सर्वे में पिछड़े तो लिंक डिलीट

एक कद्दावर प्रत्याशी के समर्थक ने मतदान के पूर्व अपने नेता की स्थिति परखने के लिए ऑनलाइन सर्वे में प्रतिद्वंंदी के नाम के साथ मोबाइल पर लिंक शेयर कर रिकवेस्ट करते हुए अपने पसंद के उम्मीदवार को वोट देने की अपील की। पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ताओं को लिंक शेयर की गई थी।

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अभी लिंक शेयर किए आधा घंटा भी नहीं हुआ कि सर्वे में नेताजी पिछड़ते हुए नजर आए। ऐसे में हड़कंप मच गया। सभी विचलित हो गए। तत्काल फरमान जारी किया, शेयर लिंक डिलीट कराओ, लेकिन बहुत देर हो गई थी। इसके बाद दो विधानसभा क्षेत्र के चार प्रमुख उम्मीदवार के लिए नई ऑनलाइन सर्वे लिंक शेयर की गई।

सबकुछ करना पर.. वो मत बांटना…

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जिले की एक विधानसभा में चुनाव की ‘आर्थिक रसद’ वार्ड के प्रभारियों तक पहुंच गई है। प्रभारी को इस रसद का उपयोग करने की पूरी छूट दी, लेकिन हिदायत मिली है कि मतदान के बाद हिसाब देना है। खैर, रसद आने की खबर के बाद वार्ड के पूर्व पार्षद ने चुनाव के वार्ड प्रभारी से मुलाकात कर चेताया कि ‘आर्थिक रसद’ का मन चाह उपयोग कर लेना, पर मेरे वार्ड में ‘वो’ नहीं बंटना चाहिए जिससे लोग झूमने लगे वरना खैर नहीं।

एक घोड़े पर सवार, तो दूसरे ई-रिक्शा में

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विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के प्रचार के दौरान कई अलग अलग रोचक नज़ारे देखने को मिल रहे हंै। ऐसे ही दो नजारे सामने आए हंै। एक में उज्जैन दक्षिण से कांग्रेस प्रत्याशी चेतन यादव प्रचार के दौरान घोड़े की सवारी करते हुए प्रचार किया। उज्जैन उत्तर से भाजपा प्रत्याशी अनिल जैन कालूहेडा की ई-रिक्शा चलाते हुए तस्वीर सामने आई है।

आग दोनों तरफ इधर भी, उधर भी

भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को कुछ दिनों पहले तक यही गुमान था टिकट वितरण को लेकर उठी असंतोष की लपटों को वे समझाइश, वादे और आश्वासनों की फुहारों से ठंडा कर देंगे। पहली सूची के बाद ऐसे प्रयासों को कुछ सफलता भी मिली। बाद की सूचियों के साथ ही जो बवंडर शुरू हुआ, वह संभाले नहीं संभल रहा है। सामान्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता तो दूर, संगठन के अध्यक्ष रहे नेताओं के स्वजन भी मानने को तैयार नहीं हैं।

उज्जैन संसदीय क्षेत्र से मैदान संभाल चुके पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने तमाम समझाइश के बाद भी अपने कदम पीछे लेने से इंकार कर दिया। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। यही हाल जिले की बडऩगर और महिदपुर सीट का है। बडऩगर में कांग्रेस के बागी राजेंद्र सिंह सोलंकी ने भी कांग्रेसी दिग्गजों की समझाइश को अनसुना कर चुनाव लडऩे का फैसला करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। महिदपुर से भाजपा से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे प्रतापसिंह आर्य भी नहीं माने है। फिलहाल दोनों ही दल असंतोष की आग में बराबर झुलस रहे हैं।

लोग यही पूछ रहे…क्या चल रहा

विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे लोगों में चुनाव को लेकर गपशप अन्य विषयों को पीछे छोड़ ज्यादा है। लोग त्योहार के समय अभी घर की साफ-सफाई और खरीदारी में व्यस्त हैं, लेकिन पान की दुकान, चाय की गुमटी और बाजार में अपने प्रियजन के साथ मिलते ही बस एक-दूसरे से एक ही बात पूछते हैं, भैया क्या चल रहा है, क्या माहौल है और किसे जीता रहे हो।

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