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आप हेलो-हेलो करते रहे साहब चुप्पी साध लेते हैं

पुलिस विभाग के आला अफसर शायद हर किसी से मोबाइल फोन पर बात करना और जानकारी देना पसंद नहीं करते है। आमतौर पर शिकायत सामने आती है कि पुलिस अधिकारी मोबाइल अटेंड नहीं करते है,लेकिन उक्त अफसर के साथ दूसरी दिक्कत है। साहब फोन तो अटेंड कर लेते है।

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परिचय और फोन लगाने का उद्देश्य जानने के बाद यदि बात नहीं करना है,तो फोन काटते नहीं है,बल्कि चुप्पी साध लेते है। सामने वाला हेलो…हेलो कर परेशान होने के बाद स्वयं ही फोन बंद कर देता है।

दर्शन करा रहे है यह क्या कम है

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कुछ अफसरों का व्यवहार और रवैया ऐसा है मानो वे उज्जैन में पदस्थ है,तो शहर पर एहसान कर रहे है। ऐसा ही कुछ पिछले दिनों सामने आया। नगर के एक प्रबुद्धजन द्वारा सामान्य चर्चा में अवगत कराया कि ‘उज्जैन हमेशा महाकाल भक्तों और मेहमानों के स्वागत में तैयार रहता है,लेकिन जिस तरह से लोग उमड़ रहे है,उसके अनुसार व्यवस्थाएं नहीं होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ता है। प्रशासन-पुलिस को उस पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके बाद एक अधिकारी का जवाब था,दर्शन कराना हमारी प्राथमिकता है और दर्शन करा रहे है यह क्या कम है?

भाजपा में प्लान बी भी तैयार है

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भाजपा ने चुनाव की घोषणा से काफी पहले प्रदेश की 39 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करके न केवल अपनी पार्टी बल्कि कांग्रेस सहित सभी को चौंका दिया है। पहली बार ऐसा हुआ है कि करीब दो महीने प्रत्याशियों के नाम घोषित हो गए हों। इनमें महाकोशल और विंध्य की 14 सीटों के प्रत्याशी भी शामिल हैं। ये सब वे सीटें हैं जिन पर पार्टी लगातार हारती रही है।

जो प्रत्याशी घोषित हुए हैं, वे खुद इतनी जल्दी नाम तय हो जाने की उम्मीद नहीं कर रहे थे। अब उन्हें तैयारी के लिए लंबा समय तो मिल ही रहा है लेकिन वे इस बात की चिंता में भी हैं कि विरोध न बढ़ जाए। जानकार बता रहे हैं कि अगर किसी सीट पर विरोध ज्यादा बढ़ा तो प्लान बी भी तैयार है। इसमें प्रत्याशी बदलने की संभावना बहुत कम है लेकिन विरोध शुरू होने से पहले ही खत्म कर देने की योजना है।

पहली सूची में ही कहीं खुशी कहीं गम

भाजपा ने मप्र विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची जारी कर दी। इसमें मालवा-निमाड़ क्षेत्र की 11 सीटों के साथ उज्जैन जिले की दो सीटे भी शामिल हैं। अब तक टिकट वितरण को लेकर तरह-तरह के कयास और संभावनाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रहे दावेदारों को पहली सूची से कहीं खुशी-कहीं गम की अनुभूति हो रही है।इतना तय है कि पहली सूची के बाद अब राजनीतिक तापमान और गर्म होना तय है क्योंकि बची सीटों के लिए जोर आजमाइश तेज होगी।

टिकट तो मिलेगा, कहां से बता नहीं सकती

जिला इलेक्शन मोड में आ चुका है। नेताओं का पूरा फोकस इन दिनों विधानसभा के जोड़-घटाव पर ही केंद्रित है। कांग्रेस हो या भाजपा दोनों दलों के कई नेता दावेदारी में पीछे नहीं है। कई मौके पर चूकी कांग्रेस की एक नेत्री को पार्टी में अपने उच्चस्तरीय संपर्कों के कारण पूरा विश्वास है कि इस बार उन्हें अवसर मिलना तय है। इसके लिए वे दावा भी कर रही है,लेकिन टिकट कहां से मिलने वाला है,यह नहीं बता पा रही है।

@शैलेष व्यास

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