Monday, January 30, 2023
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ई-रिक्शा वाले ऑटो से दो कदम आगे….

ई-रिक्शा वाले ऑटो से दो कदम आगे….दो किलोमीटर के एक सवारी से वसूल रहे 100-100 रुपये

नए साल के दूसरे दिन भी लगा रहा कई रास्तों पर जाम

शाम के समय ट्रैफिक पुलिस भी हुई नदारद….

उज्जैन।सोमवार शाम 7:30 बजे का समय…श्री महाकाल के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ रही है। इस बीच ऑटो और ई-रिक्शा वालों की मनमानी चरम पर हैं। महालोक से रेलवे स्टेशन जाने के लिए एक-एक सवारी के 100-100 रुपए लिए जा रहे हैं। बाहर से आए लोगों से दुव्र्यवहार भी किया जा रहा है। टे्रफिक पुलिस के जवान कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। टे्रेफिक को जहां पर डायवर्ट किया जा रहा है वहां पर जाम लग रहा है।

नए साल के दूसरे दिन भी श्री महाकाल के दर्शनों के लिए भक्तों की संख्या कम नहीं हुई। सोमवार को शाम के समय भीड़ और बढ़ गई। इस बीच पुलिस ने हरिफाटक ओवरब्रिज से चौपहिया वाहनों सहित ऑटो और ई-रिक्शा को प्रतिबंधित कर दिया गया। ब्रिज से सिर्फ दो पहिया वाहन ही आ-जा रहे थे।

वहीं हरिफाटक ब्रिज के नीचे रविशंकर नगर (पत्रकार कॉलोनी) की ओर ऑटो और ई-रिक्शा को आने-जाने दिया जा रहा था। इससे जयसिंहपुरा से लेकर रविशंकर नगर तक वाहनों का जमावड़ा हो गया। यहां से लोगों का निकलना ही मुश्किल हो गया। इधर ई-रिक्शा वालों की मनमानी का आलम यह है कि वे ऑटो वालों से दो कदम आगे हो गए हैं। प्रति सवारी के हिसाब से किराया वसूल रहे हैं। महालोक से रेलवे स्टेशन की दूरी मात्र दो किमी है। ई-रिक्शावाले प्रति सवारी सौ रुपए वसूल रहे हैं।

शाम होते ही बढ़ जाती है मनमानी….

ई-रिक्शावालों की मनमानी शाम होते ही बढ़ जाती है। दिन के समय तो पुलिस का खौफ रहता है। वहीं अन्य अधिकारियों का भी आना-जाना बना रहता है। सर्दी का मौसम होने से शाम के समय पुलिस जवान भी इधर-उधर हो जाते हैं। इसके बाद ये मनमाना किराया वसूलना शुरू कर देते हैं। लोगों को भी घर जाने की जल्दी रहती है। इसलिए वे अधिक किराया देकर भी इनमें बैठ रहे हैं।

बैठना है तो बैठ नीं तो आगे बड़

अक्षरविश्व प्रतिनिधि ने सोमवार की शाम को एक ई-रिक्शावाले से स्टेशन चलने के लिए कहा तो उसने एक सवारी के सौ रुपए की मांग की। फिर पूछा कि कितने लोग हैं तो बताया कि तीन लोग हंै तो तीन सौ रुपए किराया बताया।

उससे कहा कि इतने तो ज्यादा है तो कहने लगा बैठना है तो बैठ नीं तो चल आगे बड़….। इनकी दादागिरी इतनी है कि सवारियों को हड़का रहे थे। बाहर से आए लोगों को रास्ते की जानकारी नहीं होने से वे इनकी मनमानी को सहन कर इतने अधिक रुपये देकर बैठ रहे थे।

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