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उज्जैन:कोरोना कर्फ्यू में आखिर क्यों बिक रही इतनी सस्ती सब्जियां..

गर्मी में टमाटर 20 तो भिंडी व गिलकी मिल रही 30 रुपए किलो

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उज्जैन।एक तो कोरोनाकाल और दूसरा भीषण गर्मी का मौसम ऐसे में सब्जियों के भाव जमीन पर आने से लोग आश्चर्यचकित हैं क्योंकि सामान्य वर्षों में गर्मी के दौरान टमाटरों की आवक न के बराबर हो जाती है और यदि आते भी हैं तो भाव आसमान पर होते हैं, लेकिन वर्तमान में टमाटर से लेकर भिंडी और गिलकी के खेरची भाव जमीन पर आ गये हैं। किसानों का कहना है कि हमारी फसल की लागत भी नहीं निकल रही। वहीं व्यापारी बताते हैं कि ताजी सब्जियां दूसरे शहरों तक पहुंचाने का साधन नहीं इस कारण कम कीमत में बाजार में बेचना पड़ रही है।

चिमनगंज मंडी सब्जी व्यापारी राजेश बड़ोदिया ने चर्चा में बताया कि कोरोनाकाल के पहले जब हालात सामान्य हुआ करते थे तो मई जून माह में गर्मी के दौरान देशी टमाटर, हरा धनिया के भाव आसमान पर होते थे टमाटर 60 से 80 रूपये किलो तक बिक जाता था और धनिया भी 100 से 120 रूपये किलो में बेचा है लेकिन कोराना संंक्रमण के कारण बने हालातों में इनके भाव 20 से 25 रूप्ये किलो पर आ गये हैं। फेरी लगाकर ठेलों पर व्यवसाय करने वाले गली मोहल्लों में 30 रूपये किलो और इससे कम में भिंडी व गिलकी बेच रहे हैं। हालांकि आलू और प्याज के रेट जरूर बढ़े हुए हैं। व्यापारी बडोदिया ने कारण बताया कि शहर के आसपास रहने वाले किसान प्रतिदिन ताजी सब्जियां लेकर मंडी आ रहे हैं लेकिन व्यापारियों की मजबूरी है कि इन सब्जियों को परिवहन व्यवस्था नहीं होने के कारण दूसरे शहर नहीं भेज पा रहे। मंडी में आने वाले खेरची व्यापारियों को ही कम कीमत में सब्जियां बेचना पड़ रही हैं।

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थोक भाव में भिंडी 8 से 10 रुपए किलो बिक रही है
नरवर से भिंडी लेकर आये किसान गणेश रामी ने बताया कि इस वर्ष भिंडी की अच्छी फसल हुई है। सोचा था लॉकडाउन में अच्छे भाव मिलेंगे, लेकिन थोक में 8 से 10 रूपये किलो में ही भिंडी बिक रही है ऐसे में फसल की लागत भी नहीं निकल रही। मजबूरी यह है कि खेत में लगी भिंडी नहीं बेचें तो वह खेत में ही खराब हो जाएगी। टमाटर लेकर ढाबला रेहवारी से आये गणपत पटेल ने बताया कि खेत में टमाटर पककर लाल हो चुके हैं उन्हें तोड़कर मंडी लाना जरूरी है लेकिन यहां भाव ही नहीं मिल रहे। किसी दिन तो पेट्रोल के रूपये भी नहीं निकलते। लागत निकलना तो दूर की बात है।

 

 

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